उत्तराखंड। चमोली ज़िले के घोलतीर गांव के पास अलकनंदा नदी में गिरी तीर्थयात्रियों की बस हादसे में मरने वालों की संख्या अब 6 हो गई है। रविवार, 29 जून 2025 को बचाव दल ने एक और शव बरामद किया, जो हादसे की जगह से 150 किलोमीटर दूर हरिद्वार में मिला। इस खुलासे ने हादसे की भयावहता और नदी की धार की तीव्रता को उजागर कर दिया है।

अब भी 6 यात्री लापता हैं, और उनकी तलाश के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस बल द्वारा सघन सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

अब भी 6 यात्री लापता हैं, और उनकी तलाश के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस बल द्वारा सघन सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

बताया गया है कि यह निजी बस मध्य प्रदेश के तीर्थयात्रियों को लेकर बद्रीनाथ जा रही थी, जब घोलतीर गांव के पास अचानक नियंत्रण खोकर यह अलकनंदा नदी में जा गिरी। दुर्घटना के वक्त बस में कुल 26 लोग सवार थे, जिनमें से अब तक 14 को सुरक्षित बचाया गया है, जबकि 6 की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 6 लोग अब भी लापता हैं।

रविवार को जो शव हरिद्वार जिले में बरामद हुआ, उसकी पहचान पहले लापता यात्रियों में से एक के रूप में की गई है। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि नदी की तेज धारा शव को इतनी दूर कैसे ले गई। इस आधार पर बचाव दल ने खोज क्षेत्र को हरिद्वार से आगे तक भी विस्तारित कर दिया है।

चमोली ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने जानकारी दी कि नदी में बहाव तेज होने के कारण सर्च ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। “हम ड्रोन कैमरा, राफ्टिंग यूनिट और गोताखोरों की मदद ले रहे हैं। मौसम भी बार-बार बाधा बन रहा है, लेकिन हमारी टीमें लगातार काम कर रही हैं,” उन्होंने कहा।

इस हादसे को लेकर उत्तराखंड सरकार ने दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बचाव कार्यों की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं और मृतकों के परिजनों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की भी घोषणा की है।

बचाव दल के अनुसार, लापता लोगों में महिलाएं और बुजुर्ग यात्री भी शामिल हैं, जिनकी तलाश में हरिद्वार से जोशीमठ तक का पूरा नदी क्षेत्र खंगाला जा रहा है। नदी किनारे बसे गांवों को सतर्क किया गया है कि अगर किसी शव या सामान की जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।

स्थानीय निवासी भी इस रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद कर रहे हैं। एक ग्रामीण ने बताया, “हमने पहले भी इस रास्ते पर हादसे होते देखे हैं, लेकिन इस बार नदी का बहाव बहुत तेज है। लोग कई किलोमीटर तक बह गए हैं। प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन हालात काफी मुश्किल हैं।”

घटना की जांच के लिए एक प्रारंभिक टीम गठित कर दी गई है, जो देखेगी कि बस चालक की लापरवाही, सड़क की स्थिति, या वाहन की तकनीकी खामी में से किस कारण से यह हादसा हुआ। यह मार्ग पहाड़ी और घुमावदार है, जहां बारिश के कारण फिसलन भी एक आम समस्या है।

उत्तराखंड राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के एक अधिकारी ने बताया, “हम हर शव की पहचान और उनका पोस्टमॉर्टम सुनिश्चित कर रहे हैं ताकि परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए सौंपा जा सके। हर मिनट कीमती है और हम कोई कसर नहीं छोड़ रहे।”

मध्य प्रदेश सरकार ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है और पीड़ितों के परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड सरकार से समन्वय कर राहत और बचाव कार्यों को तेज करने का अनुरोध किया है।

इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों को बरसात के मौसम में पहाड़ी यात्रा से पहले पूरी सावधानी बरतने और लंबे मार्गों पर प्रशिक्षित ड्राइवरों का ही चयन करने की अपील की है।

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