कोलकाता में बंगाली संस्कृति को नई पहचान देने की दिशा में ममता बनर्जी सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार शहर में ‘दुर्गा आंगन’ का निर्माण कराएगी, जिसका शिलान्यास खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करेंगी। इसे दुर्गा पूजा और बंगाली सांस्कृतिक विरासत के स्थायी केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि दुर्गा आंगन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि यह कला, संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। यहां साल भर सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और पारंपरिक आयोजनों की योजना बनाई जा रही है, जिससे बंगाल की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच मिल सके।
सूत्रों के अनुसार, दुर्गा आंगन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, लेकिन इसकी आत्मा पूरी तरह पारंपरिक बंगाली होगी। वास्तुकला में दुर्गा पूजा पंडालों की झलक देखने को मिलेगी। कलाकारों और कारीगरों को यहां स्थायी मंच मिलेगा। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। सरकार मानती है कि दुर्गा पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि बंगाल की पहचान है और दुर्गा आंगन उसी पहचान को स्थायी रूप देगा।
राजनीतिक दृष्टि से भी इस परियोजना को अहम माना जा रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता सरकार का यह फैसला सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। विपक्ष इसे चुनावी रणनीति बता रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह योजना राजनीति से ऊपर है और बंगाल की विरासत को सहेजने के लिए जरूरी है। ममता बनर्जी पहले भी दुर्गा पूजा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिलाने को बड़ी उपलब्धि बता चुकी हैं और दुर्गा आंगन उसी दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।
अधिक राजनीतिक समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें click here
कोलकाता में बनने वाला दुर्गा आंगन आने वाले समय में सांस्कृतिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे शहर की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है। फिलहाल सबकी नजरें शिलान्यास कार्यक्रम पर टिकी हैं, जहां मुख्यमंत्री इस महत्वाकांक्षी परियोजना की औपचारिक शुरुआत करेंगी।
