जापान के झंडे में बने लाल बिंदु को देखकर हर किसी के मन में कभी न कभी सवाल जरूर उठता है—आखिर ये लाल गोला क्यों होता है? सफेद पृष्ठभूमि और बीच में उगते सूरज का प्रतीक यह डिज़ाइन दुनिया के सबसे सरल, मगर सबसे अर्थपूर्ण झंडों में से एक माना जाता है।

जापान के राष्ट्रीय ध्वज को “हिनोमारू” कहा जाता है, जिसका अर्थ है–“सूर्य का चक्र।” झंडे के बीच बना लाल बिंदु उगते हुए सूरज को दर्शाता है। जापान को दुनिया में ‘निहोन’ या ‘निप्पॉन’ कहा जाता है, जिसका मतलब है “उगते सूरज की भूमि”। इसी कारण झंडे का डिज़ाइन सीधे तौर पर जापान की पहचान और सांस्कृतिक मान्यता को दिखाता है।
इतिहास के मुताबिक, जापान का वर्तमान झंडा 1854 में आधिकारिक रूप से अपनाया गया था, जब देश यूरोपीय देशों के साथ व्यापार और कूटनीतिक रिश्तों की शुरुआत कर रहा था। उस दौर में हिनोमारू का इस्तेमाल मुख्यतः समुद्री जहाजों पर और विदेशों में जापान की पहचान दिखाने के लिए किया जाता था।
बाद में 1870 में झंडे का आधिकारिक स्पेसिफिकेशन जारी किया गया। हालांकि राष्ट्रीय ध्वज के कानून को औपचारिक रूप से जापानी संसद ने बहुत बाद में—13 अगस्त 1999—को पारित किया और मौजूदा झंडे को आधिकारिक मान्यता दी।
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जापान में सूर्य का विशेष महत्व है। माना जाता है कि जापानी शाही परिवार स्वयं “सूर्य देवी अमातेरासु” की वंशज है। इसलिए झंडे में सूरज का प्रतीक न सिर्फ राष्ट्रीय पहचान, बल्कि आध्यात्मिक महत्व भी दर्शाता है।
सरल डिज़ाइन, गहरा संदेश—इसी वजह से जापान का हिनोमारू दुनिया में सबसे यादगार झंडों में गिना जाता है।
