सीतामढ़ी (बिहार)। अगर हर इंसान पर्यावरण के लिए एक कदम बढ़ाए, तो धरती हरी-भरी हो सकती है। इस सोच को जीवन में उतारने वाले सीतामढ़ी जिले के डुमरा प्रखंड निवासी सुजीत कुमार ने खुद को पूरी तरह पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कर दिया है। पिछले एक दशक में उन्होंने अकेले 6 लाख से ज्यादा पौधे लगाए हैं। लोग अब उन्हें अलग-अलग नामों से पहचानते हैं — ‘ट्री मैन’, ‘ग्रीन लीडर’, ‘ऑक्सीजन मैन’, और ‘पौधे वाले गुरुजी’।
पेड़ लगाने को बनाया जीवन का मिशन

सुजीत कुमार का जीवन एक मिशन है — हरियाली बढ़ाओ, जीवन बचाओ। वे न केवल पेड़ लगाते हैं, बल्कि दूसरे लोगों को भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करते हैं। खासकर मनरेगा और कृषि वानिकी योजनाओं से उन्होंने हजारों किसानों को जोड़कर उन्हें भी इस हरित आंदोलन का हिस्सा बना दिया है। इससे किसानों को आर्थिक लाभ भी हो रहा है और पर्यावरण को नई सांसें भी मिल रही हैं।
स्कूल-कॉलेजों से लेकर गांवों तक चला रहे अभियान
सुजीत ने अपने अभियान को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों तक पहुंचाया है। वे विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों और पंचायतों में ‘हरित कैंपेन’ चलाते हैं। युवाओं को जोड़ने के लिए उन्होंने खास मुहिमें चलाई हैं जैसे:
“व्हेयर इज़ माई ट्री”
“सेल्फी विद माई ट्री”
इन अभियानों के जरिए युवा पीढ़ी को अपने द्वारा लगाए पौधों से जुड़ाव महसूस होता है और वे उनके संरक्षण के लिए खुद जिम्मेदार बनते हैं।
शादी-बर्थडे पर पौधा: ग्रीन गिफ्टिंग की नायाब पहल
सुजीत कुमार परंपरागत उपहारों की जगह पौधों को प्राथमिकता देते हैं। शादी, जन्मदिन, श्राद्ध, या किसी भी सामाजिक अवसर पर वे उपहार के रूप में पौधे भेंट करते हैं।
कई बार उन्होंने शादी समारोह में वर-वधू को वरमाला के साथ पौधा भी भेंट किया, जो आज के समय में पर्यावरणीय जागरूकता का जीवंत उदाहरण बन गया है।
वे एक खास टोपी पहनते हैं, जिस पर लिखा होता है —
“सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम”
यह सिर्फ एक स्लोगन नहीं, बल्कि उनके जीवन की फिलॉसफी है।
सम्मान और पहचान: देश-विदेश में मिली सराहना
सुजीत कुमार के प्रयासों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहा गया है। उन्हें कई सम्मानों और अवॉर्ड्स से नवाजा जा चुका है।
लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है — प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में योगदान और अगली पीढ़ी को एक हरा-भरा भविष्य सौंपना।
