उत्तराखंड के मशहूर शिकारी जॉय हुकिल ने चेतावनी दी है कि तेजी से बदलते माहौल के बीच तेंदुओं के व्यवहार में खतरनाक बदलाव देखने को मिल रहा है। इंसानी आबादी के करीब आ चुके ये जंगली शिकारी अब जंगलों में कठिन संघर्ष करने की बजाय आसान शिकार के शॉर्टकट तलाशने लगे हैं।

10 दिसंबर को जॉय हुकिल ने पौड़ी जिले के गजल्ड गांव में रात करीब साढ़े ग्यारह बजे एक कुख्यात आदमखोर तेंदुए को मार गिराया। यह वही तेंदुआ था जिसने 4 दिसंबर को एक व्यक्ति का शिकार किया था। हुकिल अब तक 54 आदमखोर तेंदुओं को पकड़ या मार चुके हैं—जिनमें से 47 को मौत के घाट उतारा और 7 को जिंदा पकड़ा है।

अब वयस्क भी बन रहे शिकार

जॉय हुकिल बताते हैं कि पहले तेंदुए छोटी उम्र के बच्चों को शिकार बनाते थे, लेकिन अब परिदृश्य बदल रहा है।
“अब तेंदुए वयस्क महिलाओं और पुरुषों पर भी हमला कर रहे हैं, क्योंकि बस्‍तियों के आसपास उन्हें आसान शिकार मिल जाता है।”

उनका कहना है कि जंगल में हिरन या अन्य जंगली जानवरों को मारना तेंदुए के लिए बड़ी चुनौती है। उसमें न सिर्फ अधिक ऊर्जा लगती है, बल्कि हर बार सफलता की गारंटी भी नहीं होती।

इसके उलट इंसानी बस्तियों के पास गाय, कुत्ते और अन्य पालतू पशु आसानी से मिल जाते हैं। कई बार इंसान भी उनका शिकार बन जाता है। इसी “आसान रास्ते” ने तेंदुओं को आबादी की ओर खींच लिया है।

उत्तराखंड वन्यजीव और मानव-वन संघर्ष रिपोर्ट: Click here

क्यों बढ़ रहे हैं तेंदुओं के हमले?

हुकिल का कहना है कि तेज़ी से फैलती बस्तियाँ, जंगलों का सिकुड़ना और भोजन की कमी जैसे कारण तेंदुओं को इंसानी क्षेत्रों में धकेल रहे हैं।
वे कहते हैं—
“गुलदार अब जोखिम कम और शिकार आसान ढूंढ रहा है। यही वजह है कि हमले बढ़ रहे हैं और तेंदुए बेखौफ हो गए हैं।”

उत्तराखंड के कई इलाकों में हाल के महीनों में तेंदुआ-मानव संघर्ष तेजी से बढ़ा है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

By ARPITA SARKAR

पत्रकारिता में करीब 2 साल का अनुभव रखने वाली अर्पिता सरकर, वर्तमान में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में BJMC की छात्रा हैं। उन्होंने कंटेंट राइटिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में दो साल काम किया है, विभिन्न डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लेख व वीडियो स्क्रिप्ट तैयार की हैं। अर्पिता भारतीय राजनीति, सामाजिक मुद्दे और क्राइम रिपोर्टिंग पर पैनी नजर रखती हैं।

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