Lalu Prasad Yadav Ranjan Yadav Story: राष्ट्रीय जनता दल में तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा होते ही बिहार की राजनीति में एक पुराना सवाल फिर उभर आया है. आखिर तेजस्वी को पूर्ण अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया गया? क्या यह केवल संगठनात्मक निर्णय है या इसके पीछे लालू प्रसाद यादव का पुराना अनुभव और राजनीतिक डर छिपा है? जवाब जानने के लिए हमें 2001 की उस कहानी में जाना होगा जब लालू यादव ने एक फैसला लिया और बाद के दौर में फिर खुद उसे अपनी सबसे बड़ी गलती बताया था.

हालांकि, यह सच है कि राजनीति में रिश्ते खत्म नहीं होते, सिर्फ वक्त बदलता है. 2024-2025 के आसपास डॉ. रंजन यादव फिर RJD में लौट आए और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने. वर्ष 2001 का यह किस्सा सिर्फ एक नेता के पावर में आने और जाने की कहानी नहीं है. यह बताता है कि बिहार की राजनीति में सत्ता का डर कितना गहरा है. राजनीति के जानकारों की नजर में तेजस्वी यादव को पूर्ण अध्यक्ष न बनाना सिर्फ संगठनात्मक फैसला नहीं है. यह लालू यादव की राजनीतिक स्मृति और पुराने जख्मों से निकला कदम है.

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