
पंजाब इस समय दशकों की सबसे भयावह बाढ़ से जूझ रहा है। लगातार बारिश और नदियों के उफान ने हालात इतने गंभीर बना दिए हैं कि अब पूरे राज्य के 23 जिलों को बाढ़ग्रस्त घोषित कर दिया गया है। ताज़ा सरकारी बुलेटिन के अनुसार, 1 अगस्त से 1 सितंबर के बीच आई बाढ़ ने अब तक 30 लोगों की जान ले ली है और 3.5 लाख से ज्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
सरकार और प्रशासन की चुनौती
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत और बचाव कार्यों की स्थिति की समीक्षा की। शुरुआती दिनों में केवल 12 जिलों को बाढ़ प्रभावित माना गया था, लेकिन हालात बिगड़ते चले गए और मंगलवार तक सभी 23 जिलों को बाढ़ग्रस्त घोषित करना पड़ा।
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार राहत कार्य चला रहे हैं। प्रभावित इलाकों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं जहां लोगों के लिए भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि पानी का स्तर लगातार बढ़ने से प्रशासन को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सेना और एनडीआरएफ का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
बचाव कार्य में सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें अहम भूमिका निभा रही हैं। नावों और लाइफ जैकेट्स की मदद से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर निकाला जा रहा है।
कई प्रभावित गांवों में अब भी लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें बाहर निकालने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। तस्वीरों और वीडियो में जवानों को छोटे बच्चों को गोद में उठाकर नावों में सुरक्षित ले जाते हुए देखा जा सकता है।
लाखों लोगों पर संकट
बाढ़ से प्रभावित लोग अपने घरों और खेतों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। जिन गांवों में पानी भर गया है, वहां बिजली की सप्लाई बाधित है और पीने के पानी की समस्या भी गंभीर हो गई है। किसानों की फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे आने वाले दिनों में कृषि संकट गहराने का खतरा है।
सरकार की अपील
राज्य सरकार ने केंद्र से मदद की अपील की है और अतिरिक्त राहत सामग्री, दवाइयां और नावें भेजने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
निष्कर्ष
पंजाब की यह बाढ़ प्राकृतिक आपदा से बढ़कर मानवीय संकट का रूप ले चुकी है। लाखों लोग बेघर हो चुके हैं, सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए हैं और 30 परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को पुनर्वास और राहत पहुंचाना होगी।
