नई दिल्ली, 2 जुलाई 2025: आज के डिजिटल युग में अगर आपके पास स्मार्टफोन या स्मार्टवॉच है और आप पीरियड्स अनुभव करती हैं, तो संभव है कि आपका अगला साइकल अलर्ट मोबाइल से आए। पीरियड ट्रैकिंग ऐप्स ने महिलाओं के जीवन में काफी सुविधा ला दी है – ये न सिर्फ मासिक धर्म की तारीखों को ट्रैक करते हैं, बल्कि मूड स्विंग्स, प्रजनन स्वास्थ्य, यौन संबंध नियोजन और भावनात्मक बदलावों तक को दर्ज करने की सुविधा देते हैं।

ऐपल स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद ऐसे सैकड़ों ऐप्स लाखों बार डाउनलोड हो चुके हैं। कुछ ऐप्स सिर्फ कैलेंडर के रूप में काम करते हैं, तो कुछ प्रीमियम सब्सक्रिप्शन पर स्वास्थ्य और प्रजनन संबंधी विस्तृत रिपोर्ट भी देते हैं जिन्हें आप अपने पार्टनर या डॉक्टर के साथ साझा कर सकते हैं।

लेकिन इस बढ़ती डिजिटल निर्भरता के बीच एक अहम सवाल तेजी से उठ रहा है – क्या इन ऐप्स पर दर्ज की गई आपकी बेहद निजी सेहत संबंधी जानकारी सुरक्षित है?

डेटा प्राइवेसी का बड़ा खतरा
पीरियड ट्रैकिंग ऐप्स, खासतौर पर वे जो मुफ्त हैं, आपके शरीर से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियाँ एकत्र करते हैं। इसमें न केवल आपकी पीरियड डेट्स, मूड, ऊर्जा स्तर और सेक्सुअल एक्टिविटी शामिल होती है, बल्कि कुछ ऐप्स आपसे गर्भधारण, गर्भपात, गर्भनिरोधक दवाएं और हार्मोनल बदलावों जैसी निजी जानकारी भी पूछते हैं। सवाल यह है कि इतनी संवेदनशील जानकारी आखिर किसके पास जा रही है और कैसे इस्तेमाल हो रही है?

कई रिसर्च रिपोर्ट्स और डेटा ऑडिट से यह बात सामने आई है कि बहुत से ऐप्स यूजर्स का डेटा थर्ड-पार्टी विज्ञापनदाताओं, मार्केटिंग एजेंसियों और डेटा एनालिटिक्स कंपनियों के साथ साझा करते हैं। इससे यूजर्स को न केवल प्राइवेसी की हानि होती है, बल्कि कई बार इस डेटा का इस्तेमाल उन्हें टारगेट करने के लिए भी होता है – जैसे प्रजनन संबंधित विज्ञापन या हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी प्रमोशन।

डिजिटल प्रेगनेंसी सर्विलांस का खतरा
2022 में अमेरिका में रो बनाम वेड केस के पलटने के बाद कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि पीरियड ट्रैकिंग ऐप्स का डेटा अब कानूनी मुकदमों या गर्भपात के मामलों में सबूत के तौर पर इस्तेमाल हो सकता है। यदि कोई महिला अपने साइकल में असामान्यता दर्ज करती है, और वह राज्य में गर्भपात पर प्रतिबंध लागू है – तो वह जानकारी उसके खिलाफ उपयोग हो सकती है।

यह डर भारत जैसे देशों में भी प्रासंगिक होता जा रहा है जहां डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन डेटा सुरक्षा पर कानून और जागरूकता अभी भी सीमित हैं।

पारदर्शिता की कमी
अधिकांश पीरियड ट्रैकिंग ऐप्स की प्राइवेसी पॉलिसी या तो बेहद जटिल होती हैं या फिर अस्पष्ट, जिससे आम यूजर को यह समझना मुश्किल होता है कि उसकी जानकारी कैसे और कहां स्टोर की जा रही है। बहुत से ऐप्स यह स्पष्ट नहीं करते कि डेटा क्लाउड में स्टोर हो रहा है या लोकली; एन्क्रिप्शन कितना मजबूत है, और यूजर चाहें तो अपने डेटा को डिलीट कर सकते हैं या नहीं।

क्या करें यूजर्स?
यदि आप पीरियड ट्रैकिंग ऐप इस्तेमाल करती हैं, तो नीचे दिए गए सुरक्षा उपाय ज़रूर अपनाएं:

  1. प्राइवेसी पॉलिसी ध्यान से पढ़ें – यह जानने की कोशिश करें कि आपका डेटा कहां स्टोर होता है और किनके साथ शेयर किया जाता है।
  2. एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाला ऐप चुनें – कुछ ऐप्स जैसे Euki और Drip ऐसे विकल्प प्रदान करते हैं जहां यूजर का डेटा पूरी तरह उनके नियंत्रण में होता है।
  3. गेस्ट मोड या ऑफलाइन ट्रैकिंग इस्तेमाल करें – कुछ ऐप्स ऐसी सुविधा देते हैं जिससे डेटा सिर्फ डिवाइस में ही रहता है और क्लाउड पर अपलोड नहीं होता।
  4. विकेंद्रीकृत ऐप्स पर ध्यान दें – ओपन-सोर्स और नॉन-प्रॉफिट ऐप्स ज़्यादा भरोसेमंद हो सकते हैं।
  5. बायोमेट्रिक लॉगिन ऑन करें – पासवर्ड, फेस आईडी या फिंगरप्रिंट सुरक्षा सक्रिय करें।

सरकार और कंपनियों की ज़िम्मेदारी
जैसे-जैसे डिजिटल हेल्थ ऐप्स की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे सरकारों को डेटा संरक्षण कानून और रेगुलेटरी दिशानिर्देश कड़े करने की आवश्यकता है। साथ ही, टेक कंपनियों को भी उपयोगकर्ताओं की संवेदनशील जानकारी को ‘डेटा सोना’ समझ कर बेचने से पहले नैतिकता और पारदर्शिता पर ध्यान देना चाहिए।

निष्कर्ष:
पीरियड ट्रैकिंग ऐप्स आधुनिक जीवन की सुविधा तो हैं, लेकिन ये सुविधा तब तक सुरक्षित है जब तक आपकी जानकारी आपकी अपनी है। जब यह जानकारी थर्ड-पार्टीज़ के हाथ लगती है, तो वह सिर्फ स्वास्थ्य नहीं – आपकी निजता को भी बीमार बना सकती है। जरूरी है कि यूजर सजग हो, सरकार सतर्क हो और टेक कंपनियां जिम्मेदार।

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