बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल की आग में घिरता नजर आ रहा है। राजधानी ढाका की सड़कों पर लाखों लोग एक साथ उतर आए हैं, जिससे पूरे देश में तनाव का माहौल बन गया है। इन विशाल प्रदर्शनों के चलते अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनूस की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं और सरकार पर दबाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।

दरअसल, महंगाई, बेरोजगारी और हाल के प्रशासनिक फैसलों को लेकर जनता का गुस्सा लंबे समय से सुलग रहा था, जो अब खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। इस आंदोलन में छात्र, मजदूर, युवा और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हैं। ढाका के प्रमुख चौराहों और मुख्य सड़कों पर भारी भीड़ के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और कई इलाकों में जनजीवन ठप पड़ गया है।
स्थिति को संभालने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों से प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें सामने आई हैं। प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा सरकार जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही और संवाद की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
वहीं, सरकार की ओर से शांति बनाए रखने की अपील की गई है और बातचीत के रास्ते खुले होने की बात कही जा रही है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नजर बनाए हुए है और वैश्विक मीडिया में बांग्लादेश की स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह आंदोलन सरकार के लिए गंभीर संकट का रूप ले सकता है। फिलहाल ढाका में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि बांग्लादेश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
