कोलकाता, 3 जुलाई 2025: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक विधायक और दो नगर निगम पार्षदों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

यह मामला भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या से जुड़ा है, जो चुनाव परिणामों के बाद हुई हिंसा में मारे गए थे।
चार्जशीट में नामजद आरोपी हैं – TMC विधायक परेश पाल (बेलियाघाटा विधानसभा क्षेत्र), स्वपन समद्दार (वार्ड 58 के पार्षद) और पापिया घोष (वार्ड 30 की पार्षद)। यह चार्जशीट CBI द्वारा दाखिल की गई पूरक आरोपपत्र है, जिसमें इन तीनों को हत्या, आपराधिक साजिश और हिंसा भड़काने जैसे गंभीर आरोपों में अभियुक्त बनाया गया है।
चार साल बाद न्याय प्रक्रिया में नया मोड़
यह मामला अप्रैल 2021 में हुए बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों के ठीक बाद का है। बीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की नृशंस हत्या की गई थी, जिसके बाद राज्यभर में हिंसा फैल गई थी। पहले इस केस की जांच नर्केलडांगा पुलिस स्टेशन ने शुरू की थी, लेकिन कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर अगस्त 2021 में CBI को यह जांच सौंप दी गई थी।
लगभग चार साल बाद, अब जाकर CBI ने इस केस में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए TMC के जनप्रतिनिधियों को सीधे चार्जशीट में नामजद किया है। इससे यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
BJP ने CBI की कार्रवाई का किया स्वागत
CBI की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए BJP ने इसे “देर से लेकिन सही दिशा में उठाया गया कदम” बताया है। पार्टी प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा, “चार सालों से हम अभिजीत सरकार और अन्य कार्यकर्ताओं के लिए न्याय की मांग कर रहे थे। CBI ने आखिरकार दोषियों के खिलाफ कदम बढ़ाया है।”
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार की सरपरस्ती में कार्यकर्ताओं पर हमले हुए और अब CBI की चार्जशीट ने उस राजनीतिक संरक्षण को उजागर कर दिया है।
TMC का पलटवार: राजनीतिक बदले की कार्रवाई
वहीं TMC ने CBI की इस कार्रवाई को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रत बख्शी ने कहा, “यह केंद्र सरकार द्वारा विपक्षी दलों को परेशान करने का नया तरीका है। चुनावों के बाद जो हिंसा हुई, वह दोनों पक्षों के बीच झड़पों का परिणाम थी, लेकिन केंद्र केवल TMC नेताओं को निशाना बना रही है।”
उन्होंने CBI पर “भाजपा की शाखा” की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, न कि राजनीतिक इशारे पर कार्रवाई।
क्या था पूरा मामला?
अभिजीत सरकार कोलकाता के नर्केलडांगा इलाके में रहते थे और बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता थे। 2 मई 2021 को जब पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित हुए, उसी दिन शाम को उनके ऊपर कथित रूप से TMC कार्यकर्ताओं ने हमला किया था। परिवार का दावा है कि अभिजीत को पीट-पीटकर मार डाला गया और उनका घर भी तोड़फोड़ कर जलाया गया।
इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें अभिजीत सरकार को न्याय की मांग करते हुए देखा गया था। इसके बाद बीजेपी ने राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की थी।
CBI की जांच और चार्जशीट में क्या है?
CBI द्वारा दाखिल पूरक चार्जशीट में साफ किया गया है कि घटना सुनियोजित थी और इसमें राजनीतिक प्रभावशाली लोग भी शामिल थे। जांच एजेंसी ने गवाहों के बयान, मोबाइल लोकेशन और घटनास्थल की फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।
चार्जशीट के अनुसार –
– परेश पाल पर मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है
– स्वपन समद्दार और पापिया घोष पर हमलावरों को शरण और समर्थन देने का आरोप है
– सभी के खिलाफ IPC की धारा 302 (हत्या), 120B (षड्यंत्र), 147 (दंगा), 149 (गैरकानूनी सभा) सहित अन्य धाराएं लगाई गई हैं
अगली सुनवाई की तारीख तय
CBI ने अपनी चार्जशीट कोलकाता के विशेष CBI कोर्ट में दाखिल की है। कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया है और अब अगली सुनवाई की तारीख 16 जुलाई 2025 तय की गई है। संभावना है कि इस दिन आरोपियों को समन भेजा जाएगा।
राजनीतिक तापमान बढ़ा, जनता की नजरें कोर्ट पर
इस केस ने बंगाल की राजनीति को फिर गर्मा दिया है। बीजेपी इसे अपने कार्यकर्ताओं के लिए न्याय की दिशा में जीत मान रही है, वहीं TMC इसे प्रतिशोध की कार्रवाई बता रही है। अब सबकी नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं, जो आने वाले हफ्तों में इस मामले की अगली दिशा तय करेगी।
