बिहार में भिक्षावृत्ति को खत्म करने की दिशा में नीतीश कुमार सरकार ने एक बड़ा और मानवीय कदम उठाया है। अब राज्य में भिखारी सिर्फ भीख मांगने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन और रोजगार का अवसर भी मिल रहा है। इसके लिए राज्य सरकार मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना चला रही है, जिसके तहत भिखारियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भर बनाने की व्यवस्था की गई है।

इस योजना के तहत फिलहाल बिहार के 10 जिलों में 19 भिक्षुक पुनर्वास गृह संचालित किए जा रहे हैं। इनमें पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण शामिल हैं। इन पुनर्वास गृहों में रहने वाले भिक्षुकों को निःशुल्क भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा सुविधा, परामर्श, योग और मनोरंजन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरकार का फोकस सिर्फ आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन लोगों को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना भी इस योजना का अहम हिस्सा है। कई भिक्षुकों को सिलाई, हस्तकला, सफाई कार्य और अन्य आजीविका से जुड़े प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही, बिछड़े हुए परिवारों से उन्हें दोबारा जोड़ने की भी कोशिश की जा रही है।
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राज्य सरकार इस योजना का विस्तार भी कर रही है। पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, अररिया, किशनगंज, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय, मधेपुरा, औरंगाबाद, कटिहार, अरवल और रोहतास में 14 नए भिक्षुक पुनर्वास गृह स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, भोजपुर जिले में 2 हाफ-वे होम की स्थापना भी प्रस्तावित है।
नीतीश सरकार का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ भिक्षावृत्ति पर लगाम लगेगी, बल्कि समाज के हाशिये पर खड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। यह योजना बिहार में सामाजिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
