पटना। बिहार में सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर डोमिसाइल नीति लागू करने की आवाज तेज हो गई है। राजधानी पटना समेत राज्य के कई जिलों में युवाओं का समूह इस मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहा है। हाथों में पोस्टर लिए ये युवा नारा दे रहे हैं —
“वोट दे बिहारी और नौकरी ले बाहरी, अब ये नहीं चलेगा!”
प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि बिहार के युवाओं को सरकारी नौकरियों में 100% प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि राज्य के अंदर ही रोजगार के अवसर बढ़ सकें और पलायन रुके।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने 6 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें राज्य के युवाओं को रोजगार में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की बात शामिल है:
- सभी सरकारी नौकरियों में डोमिसाइल अनिवार्य किया जाए।
यानी बिहार की सरकारी भर्तियों में आवेदन के लिए राज्य का निवासी होना जरूरी हो। - BPSC TRE (प्राथमिक शिक्षक बहाली) में 100% डोमिसाइल लागू हो।
वर्तमान में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों के उम्मीदवार इन पदों पर चयनित हो रहे हैं। - दूसरी सरकारी भर्तियों में 90% सीटें बिहार के युवाओं के लिए आरक्षित हों।
इसमें माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक शिक्षक, दारोगा, सिपाही, BSSC, लाइब्रेरियन जैसी भर्तियां शामिल हैं। - बिहार से बाहर के उम्मीदवारों के लिए 10% सीटें आरक्षित रहें, चयन मेरिट के आधार पर हो।
- सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में बिहार से संबंधित एक स्पेशल पेपर शामिल किया जाए, ताकि राज्य की जानकारी रखने वाले युवाओं को लाभ मिल सके।
- भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
हाल ही में कई भर्तियों में गड़बड़ी और घोटालों के आरोप लग चुके हैं, जिससे युवाओं में असंतोष है।
युवाओं का तर्क: बाहरियों से हो रही प्रतियोगिता असमान
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब बिहार के युवा अपने ही राज्य में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें देश के दूसरे हिस्सों से आए उम्मीदवारों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इससे बिहार के छात्रों के चयन की संभावना कम हो जाती है, खासकर जब बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को बेहतर तैयारी और संसाधन उपलब्ध होते हैं।
दूसरे राज्यों की तर्ज पर नीति की मांग
युवाओं का यह भी कहना है कि हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश जैसे कई राज्यों में डोमिसाइल नीति पहले से लागू है, जिससे उनके स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलती है। बिहार में भी इसी तरह की नीति लागू होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड
इस मांग को लेकर सोशल मीडिया पर भी एक मुहिम शुरू हो गई है। #DomicilePolicyForBihar जैसे हैशटैग ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। हजारों युवाओं ने वीडियो और पोस्ट के जरिए इस मुद्दे को उठाया है।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बढ़ते जन दबाव को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस पर विचार कर सकती है। यह मुद्दा आने वाले चुनावों में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
