अफगानिस्तान में आए भीषण भूकंप से तबाही के बाद भारत ने त्वरित मानवीय मदद भेजी है। सोमवार देर रात भारतीय विमान द्वारा 21 टन राहत सामग्री काबुल पहुंचाई गई। यह सहायता उन हजारों परिवारों के लिए जीवन रेखा साबित होगी जो इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, रविवार देर रात पूर्वी अफगानिस्तान में 6.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने कई जिलों को हिला कर रख दिया। अब तक 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2,500 लोग घायल हैं। भूकंप के झटकों से सैकड़ों घर जमींदोज़ हो गए और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

भारत की त्वरित मदद

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि भारत की ओर से भेजी गई यह राहत सामग्री सोमवार को काबुल पहुंची। उन्होंने कहा,
“भारतीय भूकंप सहायता अब काबुल पहुंच चुकी है। भारत अफगानिस्तान की जनता के साथ इस कठिन समय में पूरी मजबूती से खड़ा है। हम ज़मीनी हालात पर नजर रखेंगे और आने वाले दिनों में और मानवीय सहायता भेजेंगे।”

राहत सामग्री में तंबू, दवाइयां, कंबल, बिस्कुट पैक, पानी की बोतलें और अन्य ज़रूरी सामान शामिल है। इसका मकसद प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत देना और ज़रूरतमंदों तक तुरंत मदद पहुंचाना है।

अफगानिस्तान में तबाही का मंजर

भूकंप से प्रभावित इलाकों में हर ओर मलबा और टूटे घरों का मंजर है। बचाव कार्य में लगे स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दल लगातार मलबे से लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन खराब सड़क संपर्क और सीमित संसाधन राहत कार्य में बड़ी चुनौती बन रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी स्थिति पर चिंता जताई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अधिक से अधिक सहायता भेजने की अपील की है।

भारत- अफगानिस्तान रिश्तों में मानवीय आयाम

भारत लंबे समय से अफगानिस्तान को विभिन्न संकटों में मानवीय सहायता प्रदान करता रहा है। चाहे कोविड-19 महामारी हो या खाद्य संकट, भारत ने दवाइयों, गेहूं और जीवनरक्षक सामग्रियों की आपूर्ति की है। मौजूदा भूकंप त्रासदी में भी भारत की त्वरित कार्रवाई दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती को दर्शाती है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई लोग अब भी मलबे में दबे हुए हैं। इस बीच भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखेगा और जरूरत पड़ने पर और भी मानवीय सहायता भेजी जाएगी।

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