रांची/हजारीबाग। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार (4 जुलाई 2025) को झारखंड में कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई राज्य के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनके परिजनों के खिलाफ चल रही अवैध बालू खनन और वसूली से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई।

अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, हजारीबाग और रांची में कम से कम आठ ठिकानों पर सुबह से ही छापेमारी की गई। ये सभी स्थान योगेंद्र साव, उनके परिवार के सदस्यों और कुछ नजदीकी सहयोगियों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है। ED की टीमों ने विभिन्न ठिकानों से दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं। फिलहाल जब्त सामान की जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, यह मामला राज्य में अवैध बालू खनन और उससे होने वाली कथित वसूली के जरिए अर्जित काले धन से जुड़ा है। इन गतिविधियों में राजनेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।

पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी पत्नी भी अतीत में कानून के घेरे में आ चुके हैं। इससे पहले भी उन पर हिंसा भड़काने, अवैध गतिविधियों में लिप्त रहने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने जैसे आरोप लग चुके हैं।

ED की टीमों ने जिन ठिकानों पर छापे मारे, उनमें साव परिवार के निवास, कारोबारी प्रतिष्ठान और कुछ सहयोगियों के घर शामिल हैं। कुछ स्थानों पर स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में तलाशी ली गई ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।

झारखंड में पिछले कुछ वर्षों से अवैध खनन, खासकर बालू और कोयले से जुड़े मामलों में आर्थिक अपराध शाखा और ED लगातार जांच कर रही हैं। राज्य में कई पूर्व और वर्तमान नेताओं पर जांच एजेंसियों की नजर है।

ED ने इस कार्रवाई पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं या संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है।

राजनीतिक हलकों में इस छापेमारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को ‘देर से सही लेकिन जरूरी कदम’ बताया है, जबकि साव समर्थकों का दावा है कि यह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।

योगेंद्र साव कभी झारखंड सरकार में ताकतवर मंत्री माने जाते थे और हजारीबाग क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार रहा है। हालांकि, पिछले कुछ सालों से वह विवादों में घिरे रहे हैं और राजनीतिक प्रभाव भी कम होता गया है।

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