बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने अपनी जिंदगी का सबसे दर्दनाक दौर याद किया है।
उन्होंने बताया कि ड्रग्स की लत ने उनका जीवन लगभग खत्म कर दिया था।
संजय दत्त ने स्वीकार किया कि वह खुद को “मरता हुआ इंसान” समझ चुके थे।
अभिनेता ने कहा कि उन्होंने कई बार खुद को आईने में देखकर डर महसूस किया।

संजय दत्त के मुताबिक, उनका व्यवहार बदल गया था।
शरीर कमजोर हो रहा था और मानसिक हालत बिगड़ चुकी थी।
उन्हें लगने लगा था कि अब वह इससे बाहर नहीं निकल पाएंगे।
यही वजह थी कि उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त से मदद मांगी।
संजय दत्त ने बताया कि उनके पिता ने तुरंत उन्हें रिहैब भेजने का फैसला किया।
सुनील दत्त चाहते थे कि उनका बेटा जिंदगी में दोबारा खड़ा हो सके।
रिहैब के दिनों को संजय दत्त ने “सबसे कठिन समय” बताया।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ शरीर से नहीं, बल्कि दिमाग से थी।
अभिनेता ने यह भी खुलासा किया कि वे इस दौरान लगातार टूट रहे थे।
उन्हें जेल जाना पड़ा, कोर्ट केस झेलने पड़े और मानसिक दबाव बढ़ गया।
संजय दत्त ने कहा कि जेल ने उन्हें जिंदगी को नए नजरिए से देखना सिखाया।
उन्होंने वहीं से खुद को दोबारा संभालने की शुरुआत की।
संजय दत्त ने माना कि उन्हें अपनी गलतियों का एहसास है।
उन्होंने बताया कि परिवार ने उन्हें जीवन में वापस लौटने की ताकत दी।
उनका कहना है कि इंसान गिर सकता है, लेकिन उठने का फैसला खुद करना पड़ता है।
अभिनेता युवाओं को संदेश देते हैं कि ड्रग्स सिर्फ जिंदगी बर्बाद करती है।
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संजय दत्त ने इंटरव्यू में कहा कि अगर परिवार नहीं होता, तो वह शायद आज जिंदा नहीं होते।
उन्होंने पिता को “अपना सबसे बड़ा सहारा” बताया।
संजय दत्त की यह कहानी सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में है।
उनके प्रशंसक उनकी मजबूती और वापसी की तारीफ कर रहे हैं।
