यमुना प्रदूषण पर सरकार की बड़ी रिपोर्ट: गंदा पानी, ET Plants की कमी और कचरे का बोझ
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी की बिगड़ती हालत पर केंद्र सरकार ने अपनी रिपोर्ट पेश की है. जल शक्ति मंत्रालय की मानें तो यमुना का प्रदूषण अभी भी गंभीर स्तर पर है और इसके पीछे मुख्य वजह है—
अनट्रीटेड सीवेज, अधूरे STP/ETP प्रोजेक्ट और ठोस कचरा प्रबंधन की भारी कमी।

सोमवार (1 दिसंबर 2025) को राज्यसभा में जानकारी देते हुए जल शक्ति राज्यमंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि दिल्ली हर दिन 11,862 टन ठोस कचरा पैदा करती है, जबकि इसकी प्रोसेसिंग क्षमता सिर्फ 7,641 टन है. यानी 4,221 टन कचरा रोज़ बिना प्रोसेस किए रह जाता है, जो नदी और पर्यावरण दोनों पर भारी दबाव बनाता है.
मंत्रालय ने यह भी कहा कि कई इलाकों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) या तो अधूरे हैं, या क्षमता से कम काम कर रहे हैं. ऐसे में घरों, फैक्ट्रियों और नालों का गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है.
रिपोर्ट में साफ कहा गया कि प्रोजेक्ट देरी, सीवेज नेटवर्क का कमजोर ढांचा, और औद्योगिक कचरे की निगरानी में कमी ने हालात और खराब किए हैं.
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सरकार का कहना है कि यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए चल रहे प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा किया जाएगा और ठोस कचरे की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा.
