नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए एक अहम बदलाव किया है, जिससे रोजाना ट्रेन से सफर करने वालों को सतर्क रहने की जरूरत है। अब कुछ खास परिस्थितियों में केवल मोबाइल स्क्रीन पर टिकट दिखाकर यात्रा करना मान्य नहीं होगा। रेलवे का कहना है कि यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और टिकट सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

डिजिटल युग में टिकट बुकिंग से लेकर भुगतान तक सब कुछ मोबाइल पर निर्भर हो गया है। लेकिन हाल के महीनों में रेलवे के सामने फर्जी टिकट और धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़े हैं। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नकली अनारक्षित टिकट बनाकर यात्रा करने के कई मामले सामने आए हैं। इसी को देखते हुए रेलवे ने अनारक्षित टिकटों को लेकर नियमों में सख्ती की है।
नए नियम के अनुसार, यूटीएस (UTS ऐप), एटीवीएम या रेलवे काउंटर से लिए गए अनारक्षित टिकट अगर सिर्फ मोबाइल स्क्रीन पर दिखाए जाते हैं, तो उन्हें वैध नहीं माना जाएगा। ऐसे यात्रियों को टिकट की छपी हुई हार्ड कॉपी अपने पास रखना अनिवार्य होगा। हालांकि राहत की बात यह है कि ई-टिकट और एम-टिकट (आरक्षित टिकट) इस नियम के दायरे में नहीं आते हैं और इन्हें पहले की तरह मोबाइल में दिखाया जा सकता है।
रेलवे द्वारा सख्ती की बड़ी वजह जयपुर रूट से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला है। जांच के दौरान कुछ छात्र मोबाइल में टिकट दिखाकर यात्रा कर रहे थे। टिकट में क्यूआर कोड, किराया और यात्रा विवरण सब सही लग रहा था। लेकिन गहराई से जांच करने पर पता चला कि AI टूल की मदद से एक ही अनारक्षित टिकट को एडिट कर उसमें 7 यात्रियों के नाम जोड़ दिए गए थे। यानी एक टिकट पर सात लोग यात्रा कर रहे थे।
इस घटना के बाद रेलवे ने सभी मंडलों को अलर्ट जारी कर दिया है। अब टीटीई और टीसी को विशेष ऐप उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनसे क्यूआर कोड, यूटीएस नंबर और कलर कोड की तुरंत जांच की जा सकेगी। रेलवे अधिकारियों ने साफ कहा है कि अनारक्षित टिकट की हार्ड कॉपी साथ न होने पर यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।
