कोलकाता, 2 जुलाई 2025: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी की बंगाल इकाई को 3 जुलाई को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने वाला है। राज्य विधानसभा चुनावों में एक साल से भी कम का समय शेष होने के बीच संगठनात्मक स्तर पर यह बदलाव पार्टी की आगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राज्य चुनाव कार्यालय द्वारा 1 जुलाई को अधिसूचना जारी की गई जिसमें बताया गया कि राज्य अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 3 जुलाई को पूरी कर ली जाएगी।
यह अधिसूचना पार्टी के राज्य रिटर्निंग ऑफिसर और विधायक दीपक बर्मन द्वारा जारी की गई है।
वर्तमान में पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष पद पर सुकांत मजूमदार काबिज हैं, जो बालुरघाट से दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। साथ ही वे वर्ष 2024 से केंद्र सरकार में शिक्षा और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मामलों के राज्य मंत्री भी हैं। उनका पार्टी अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल पूरा हो चुका है और वे फिलहाल एक्सटेंडेड टेन्योर पर हैं।
बीजेपी की ‘एक पद, एक व्यक्ति’ (One Post One Person) नीति सुकांत मजूमदार के पुनर्नियुक्ति की राह में सबसे बड़ी अड़चन बन गई है। पार्टी अब यह स्पष्ट संकेत दे चुकी है कि किसी भी व्यक्ति को दो जिम्मेदारियों के साथ नहीं रखा जाएगा। ऐसे में अब नए चेहरे की तलाश शुरू हो चुकी है जो संगठन को अगले विधानसभा चुनाव तक मजबूती से संभाल सके।
सूत्रों के अनुसार, संगठन में यह विचार किया जा रहा है कि नया प्रदेश अध्यक्ष कोई ऐसा चेहरा हो जो न केवल जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़ा हो, बल्कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस से सख्त टक्कर देने की राजनीतिक क्षमता भी रखता हो।
भाजपा सूत्रों ने संकेत दिया है कि संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हो चुका है और अब नाम लगभग तय कर लिया गया है, जिसे 3 जुलाई को औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव 2026 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, ताकि बंगाल में बीजेपी अपनी रणनीति को और आक्रामक बना सके। वर्ष 2021 के चुनाव में पार्टी ने 77 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस को चुनौती दी थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में उसे कुछ झटके लगे, जिससे संगठनात्मक बदलाव की आवश्यकता महसूस की गई।
बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा बार-बार यह कहा गया है कि संगठनात्मक अनुशासन और ज़िम्मेदारी का स्पष्ट बंटवारा होना चाहिए। यही कारण है कि जिन नेताओं को केंद्र में मंत्री पद मिला है, उनसे संगठनात्मक भूमिका हटाई जा रही है।
राज्य बीजेपी में नेतृत्व बदलाव के इस मौके को विपक्ष ने भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने कहा कि बीजेपी के पास नेतृत्व का संकट है और लगातार चेहरों को बदलकर वे अपनी असफलता छिपा रहे हैं। टीएमसी ने यह भी दावा किया कि बंगाल की जनता ने बीजेपी को नकार दिया है और यह बदलाव उसी की स्वीकारोक्ति है।
हालांकि, बीजेपी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन एक नियमित प्रक्रिया है और संगठन को मजबूती देने के लिए यह किया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने भरोसा जताया है कि नया प्रदेश अध्यक्ष 2026 के चुनाव में ममता बनर्जी को कड़ी चुनौती देगा।
राज्य बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह बदलाव कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने के लिए है। हम 2026 के चुनावों में पूरी तैयारी के साथ उतरेंगे और बंगाल में जनादेश का सम्मान करेंगे।”
यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी किस नए चेहरे को बंगाल बीजेपी की कमान सौंपती है। क्या वह युवा चेहरा होगा, या कोई संगठनात्मक रूप से अनुभवी नेता? क्या नेतृत्व में बदलाव से पार्टी को आगामी विधानसभा चुनावों में मजबूती मिलेगी या अंदरूनी गुटबाज़ी बढ़ेगी?
3 जुलाई को इन सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा।
