बिहार की राजनीति में राबड़ी आवास एक बार फिर सुर्खियों में है और इस बार चर्चा के केंद्र में मंत्री विजय चौधरी आ गए हैं। आवास के इस्तेमाल और उससे जुड़े प्रशासनिक फैसलों को लेकर उठा यह मामला अब सियासी रंग ले चुका है, क्योंकि सवाल विपक्ष से ज्यादा अपनी ही पार्टी के भीतर से उठ रहे हैं।

पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि राबड़ी आवास से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता और संवाद की कमी रही, जिससे गलतफहमियां पैदा हुईं और असंतोष खुलकर सामने आ गया। इसी वजह से विजय चौधरी को सीधे आरोपित किए बिना भी उनकी भूमिका पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, आवास से जुड़े फैसलों की टाइमिंग और प्रक्रिया को लेकर संगठन के एक धड़े में नाराजगी है। यह नाराजगी सिर्फ एक आवास तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पार्टी के भीतर पावर बैलेंस और संगठन बनाम सरकार की खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। कई नेताओं का मानना है कि राबड़ी आवास केवल बहाना बना, असल मुद्दा निर्णय प्रक्रिया में सहभागिता का है। यही वजह है कि मामला धीरे-धीरे सार्वजनिक बहस में बदल गया और विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का मौका मिल गया।

विपक्ष ने इस विवाद को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और विशेष सुविधा जैसे आरोप भी लगाए, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, मंत्री विजय चौधरी ने सामने आकर सफाई दी और कहा कि सभी फैसले नियमों के तहत लिए गए हैं तथा किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई है। इसके बावजूद पार्टी के भीतर बनी असहजता पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही, क्योंकि अंदरखाने चर्चा अभी भी जारी है।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद एक संकेत है कि पार्टी के भीतर दबा असंतोष अब सामने आने लगा है। आने वाले दिनों में नेतृत्व इस मुद्दे को कैसे संभालता है, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल राबड़ी आवास को लेकर उठा यह विवाद बिहार की सियासत में हलचल बनाए हुए है और मंत्री विजय चौधरी लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

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