राहुल गांधी ने कहा है कि जब भी भारत में कोई विदेशी प्रतिनिधिमंडल आता है, तो विपक्षियों को उनसे मिलने नहीं दिया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले यह परंपरा अटल बिहारी वाजपेयी या मनमोहन सिंह सरकारों के समय होती थी, लेकिन अब इसे दरकिनार किया जा रहा है।

राहुल गांधी ने कहा, “हम भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं, सिर्फ सरकार ही नहीं। लेकिन सरकार चाहती है कि विदेशी मेहमानों से हम मुलाकात न करें।” उन्होंने इसके पीछे “असुरक्षा” का हवाला दिया।

हालाँकि, केंद्र की ओर से इस दावे को खारिज किया गया है। सरकार का कहना है कि विदेशी प्रतिनिधिमंडल तय करता है कि वह किस से मिलना चाहता है। यह किसी प्रकार का प्रतिबंध या रोक नहीं है।

केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि राहुल गांधी राजनीति को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कहा कि राहुल भारत को कोसते हैं और ऐसे आरोप लगाकर सिर्फ ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

सरकार की ओर से उदाहरण भी दिए गए हैं कहा गया है कि पिछले कुछ समय में कई विदेशी नेताओं ने विपक्ष से मुलाकात की है। यानी आरोपों में सच्चाई नहीं।

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वहीं, विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में भिन्न आवाजों का मिलना-जुलना जरूरी है। उनका तर्क है कि विदेशी दौरे, वार्ता, और द्विपक्षीय संबंधों में सिर्फ सत्ता पक्ष की भागीदारी लोकतांत्रिक नहीं है।

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