कोलकाता, 2 जुलाई 2025: टीम इंडिया के स्टार तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी को अपनी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां और बेटी के लिए अब हर महीने ₹4 लाख का गुज़ारा भत्ता देना होगा। यह आदेश कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम सुनवाई के दौरान सुनाया है। कोर्ट ने इस आदेश में साफ किया कि जब तक मामला पूरी तरह से निपट नहीं जाता, तब तक शमी को यह राशि हर महीने चुकानी होगी।
हसीन जहां ने मार्च 2018 में अपने पति मोहम्मद शमी और उनके परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में उन्होंने “शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना” की बात कही थी।

यह मामला तब सामने आया था जब शादी के चार साल पूरे हो चुके थे। शमी और हसीन की शादी अप्रैल 2014 में हुई थी।
कोर्ट के आदेशानुसार, शमी को ₹80,000 अपनी बेटी के लिए और ₹3,20,000 पत्नी हसीन जहां के लिए मासिक भत्ते के रूप में देने होंगे। यह आदेश एक अंतरिम राहत के तौर पर पारित किया गया है जब तक इस मामले का अंतिम फैसला नहीं आ जाता।
कोर्ट ने माना कि हसीन जहां और उनकी बेटी की आर्थिक ज़रूरतें पूरी करना शमी की ज़िम्मेदारी है, खासकर तब जब वह एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं और उनकी आमदनी लाखों में है। हाईकोर्ट ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि हसीन जहां और बेटी शमी से अलग रह रही हैं और उनके पास कोई निश्चित आय का साधन नहीं है।
हसीन जहां के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि शमी एक सफल और स्थापित क्रिकेटर हैं, जिनकी आमदनी बीसीसीआई, विज्ञापनों और आईपीएल के ज़रिए करोड़ों में होती है। ऐसे में उनकी पत्नी और बेटी के जीवन यापन के लिए यह भत्ता न्यायोचित है।
मोहम्मद शमी के वकील ने कोर्ट में यह तर्क दिया कि हसीन जहां खुद भी मॉडलिंग और इवेंट्स से आय अर्जित करती हैं, इसलिए इतनी बड़ी राशि देना अनुचित है। हालांकि कोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि बेटी की परवरिश और पत्नी के खर्चों को देखते हुए शमी को यह राशि देना आवश्यक है।
गौरतलब है कि शमी और हसीन जहां के बीच विवाद काफी समय से चल रहा है। 2018 में जब यह विवाद सार्वजनिक हुआ था, तब भारतीय क्रिकेट में भी इसे लेकर हलचल मच गई थी। बीसीसीआई ने उस समय शमी के कॉन्ट्रैक्ट पर भी विचार स्थगित कर दिया था, हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी।
विवाद के बाद भी शमी का क्रिकेट करियर बरकरार रहा है। उन्होंने भारत के लिए कई अहम मैच खेले हैं और हाल ही में आईपीएल 2025 में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। लेकिन व्यक्तिगत जीवन में चल रहा यह विवाद अब भी कोर्ट-कचहरी में उलझा हुआ है।
यह आदेश ऐसे समय पर आया है जब शमी की छवि एक जिम्मेदार क्रिकेटर और परिवारिक व्यक्ति के रूप में देखी जाती है। अब कोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर उनके निजी जीवन को सुर्खियों में ला दिया है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यह आदेश अंतरिम है और फाइनल निर्णय आने तक शमी को हर महीने यह राशि चुकानी होगी। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू हो सकती है।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कुछ लोग इसे हसीन जहां की जीत बता रहे हैं, तो कुछ इसे शमी के खिलाफ कठोर कदम मान रहे हैं। ट्विटर पर #MohammedShami, #HasinJahan, #AlimonyOrder जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
