विदेश में पढ़ाई की प्लानिंग कर रहे भारतीय छात्रों के लिए यह बड़ी खबर है। डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहे रुपए ने विदेश में रहने और घूमने का खर्च बड़ा दिया है। पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपया 84.68 से गिरकर 90.19 रुपए तक पहुंच गया है, जिससे विदेशी मुद्राओं की खरीद पहले से 7–8% तक महंगी हो गई है।

7.5 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ रहे हैं और उन्हें हर महीने भारत से पैसे भेजे जाते हैं। माता-पिता का कहना है कि रुपए की कमजोरी के चलते अब ट्यूशन फीस, हॉस्टल फीस, ग्रोसरी और ट्रैवल—सब कुछ महंगा हो गया है।
यात्रा लागत भी तेज़ी से बढ़ रही है। यूरो और डॉलर के रेट उछलने के कारण विदेश में घूमना-फिरना पहले से काफी महंगा पड़ने लगा है। छात्र अब अपने ट्रैवल प्लान कम कर रहे हैं क्योंकि हर ट्रांजैक्शन पर ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर रुपए की गिरावट जारी रही तो मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स भी महंगे हो सकते हैं, क्योंकि इनकी मैन्युफैक्चरिंग में उपयोग होने वाला अधिकांश कच्चा माल आयात होता है।
हालांकि, सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का कहना है कि रुपए की गिरावट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ेगा और न ही इससे महंगाई या निर्यात पर कोई बड़ा प्रभाव दिख रहा है।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि अमेरिका के साथ भारत के व्यापार समझौते में देरी और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता इस गिरावट की मुख्य वजहें हैं। जैसे ही व्यापार समझौता आगे बढ़ेगा, रुपए में मजबूती लौटने की उम्मीद है।
