तेज बुखार, गंभीर फ्लू और लगातार बेचैनी—लेकिन हौसला ऐसा कि ट्रॉफी भी छोटी पड़ जाए। स्मृति मंधाना ने WPL फाइनल में कुछ ऐसा ही कर दिखाया। मैच से पहले उनकी तबीयत बेहद खराब थी, फिर भी उन्होंने मैदान पर उतरकर अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। शारीरिक कमजोरी के बावजूद स्मृति ने बेहतरीन बल्लेबाज़ी करते हुए दबाव भरे फाइनल में मैच जिताऊ पारी खेली और साबित कर दिया कि जज़्बा हालात से बड़ा होता है।

इस पारी ने न सिर्फ उनकी टीम को WPL खिताब दिलाया, बल्कि महिला क्रिकेट के इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय भी जोड़ दिया। स्मृति मंधाना की यह रात आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन गई है, जहां जुनून ने बीमारी को मात दे दी।
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