हजारीबाग, 3 जुलाई 2025: झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए हजारीबाग जिले के 23 सरकारी स्कूलों में लैंग्वेज लैब (Language Lab) की शुरुआत की गई है, जिससे कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थी अब फर्राटेदार अंग्रेज़ी और संस्कृत बोल सकेंगे।

इन लैब्स की स्थापना 4 मुख्यमंत्री उत्कृष्ट स्कूल और 19 आदर्श विद्यालयों में की गई है।

यह पहल झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) की ओर से तैयार किए गए एक विशेष 3 वर्षीय प्रोजेक्ट के अंतर्गत की जा रही है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को भाषा के हर पहलू में दक्ष बनाना है।

राज्य के 405 स्कूलों में बन रही लैब
केवल हजारीबाग ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड राज्य में कुल 405 स्कूलों में लैंग्वेज लैब स्थापित की जा रही हैं, जिनमें 80 मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय शामिल हैं। इस प्रयास के पीछे सोच है – भाषा के चार कौशलों यानी सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना में विद्यार्थियों को दक्ष बनाना, ताकि वे आधुनिक और व्यावसायिक दुनिया में संवाद के स्तर पर पीछे न रहें।

क्या है लैंग्वेज लैब प्रोजेक्ट?
लैंग्वेज लैब एक प्रकार की डिजिटल भाषा प्रयोगशाला है, जो विद्यार्थियों को ऑडियो और वीडियो आधारित अभ्यास के ज़रिए भाषा में बेहतर पकड़ बनाने में मदद करती है। यहां विद्यार्थियों को हेडफोन, मॉड्यूल आधारित शिक्षण, और इंटरैक्टिव अभ्यास जैसी तकनीकों से अंग्रेज़ी और संस्कृत दोनों भाषाओं में सिखाया जाता है।

इसके साथ ही, विद्यार्थियों को “वर्ड्स वर्थ” नामक एक विशेष ऐप भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे स्वयं अभ्यास कर अपने बोलने और समझने की क्षमता को बढ़ा सकें।

शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरू
भाषा प्रयोगशालाओं के सुचारू संचालन के लिए शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हजारीबाग स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में 1 जुलाई से आवासीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हो चुका है। प्रत्येक बैच में 50 से अधिक शिक्षक शामिल हैं, जिन्हें 7 दिनों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण की जिम्मेदारी गुजरात की वर्ड्स वर्थ एनजीओ ने उठाई है। यह संस्था शिक्षकों को न केवल लैब का तकनीकी संचालन सिखा रही है, बल्कि उन्हें प्रभावी अंग्रेजी बोलने का आत्मविश्वास भी दे रही है।

विद्यार्थियों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का भाषा अनुभव
लैंग्वेज लैब की मदद से अब सरकारी स्कूलों के बच्चे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की भाषा शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। अभ्यास के दौरान वे शुद्ध उच्चारण, व्याकरण, और शब्दावली में सुधार कर सकेंगे। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों पृष्ठभूमियों के छात्र समान रूप से लाभांवित होंगे।

शिक्षकों की राय
प्रशिक्षण में शामिल एक शिक्षक सुमन कुमारी ने बताया, “पहली बार सरकार की ओर से ऐसा व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल रहा है जिससे हम बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि उन्हें बोलने-समझने की नई दुनिया से जोड़ पाएंगे।”

बच्चों में दिखा उत्साह
प्रयोगशाला में बैठकर हेडफोन के ज़रिए पढ़ाई करना अब तक केवल प्राइवेट स्कूलों तक सीमित था, लेकिन इस पहल ने सरकारी स्कूल के बच्चों के चेहरे पर भी आत्मविश्वास की चमक ला दी है। विद्यार्थी बताते हैं कि लैब में पढ़ाई बिल्कुल अलग अनुभव है – सीखने में मजा आता है और बोलने में डर नहीं लगता।

भविष्य की दिशा तय कर रही पहल
यह पहल न केवल झारखंड के शिक्षा ढांचे को डिजिटल बना रही है, बल्कि यह सुनिश्चित कर रही है कि भाषा कोई बाधा न रहे, बल्कि सफलता का साधन बने। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो आने वाले वर्षों में झारखंड देश के सबसे सशक्त सरकारी शिक्षा मॉडल में गिना जाएगा।

JEPC की भूमिका और विजन
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) का उद्देश्य सरकारी स्कूलों को गुणवत्तापूर्ण और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है। लैंग्वेज लैब की स्थापना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे विद्यार्थियों की संचार क्षमता और करियर की संभावनाएं दोनों को मजबूती मिल रही है।

निष्कर्ष
हजारीबाग में शुरू हुआ लैंग्वेज लैब प्रोजेक्ट राज्यभर के सरकारी स्कूलों के लिए रोल मॉडल बन सकता है। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, शिक्षक में दक्षता और स्कूलों में आधुनिकता आएगी। यदि यह योजना सफल रही तो आने वाले समय में झारखंड के ग्रामीण स्कूलों से भी अंग्रेज़ी बोलने वाले आत्मविश्वासी छात्र निकलेंगे, जो ग्लोबल मंच पर राज्य का नाम रौशन करेंगे।

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