
Instantvarta newsdesk नई दिल्ली, (9 अक्टूबर 2025) — सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने चुनाव आयोग (ECI) से यह स्पष्ट करने की मांग की कि बिहार की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान अंतिम मतदाता सूची से कितने विदेशी नागरिकों को हटाया गया।
उन्होंने कहा कि आयोग को पारदर्शिता बरतते हुए यह जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, क्योंकि यह चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है।

याचिका में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य के करीब 7.4 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 1,087 लोगों पर नागरिकता संबंधी आपत्तियाँ दर्ज की गई थीं, जिनमें से 390 नामों को अंतिम सूची से हटाया गया। इसके अलावा, चौंकाने वाली बात यह रही कि 796 व्यक्तियों ने स्वयं को विदेशी घोषित किया, जबकि 41 लोगों ने खुद को मृत बताया।
योगेंद्र यादव ने अदालत को बताया कि हालिया संशोधन के दौरान 47 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया ने “महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी” में भी असंतुलन पैदा किया है, जिससे वर्षों में हुई प्रगति पीछे चली गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें नि:शुल्क कानूनी सहायता और आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को तय की गई है।
