अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को राम जन्मभूमि मंदिर में विशेष ध्वजारोहण करेंगे। शहर में उत्साह चरम पर है। पोस्टर, झंडे और सजावट से पूरा इलाका जगमगा रहा है।
कार्यक्रम को लेकर धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही हलकों में चर्चा तेज है। कई विद्वान इसे दूसरी प्राण प्रतिष्ठा जैसा महत्व दे रहे हैं।
क्यों उठ रहा ‘दूसरी प्राण प्रतिष्ठा’ का सवाल?
मंदिर निर्माण अब पूर्ण रूप से पूरा हो चुका है। इस बार उत्सव पहले से बड़ा और भव्य होगा।
सहायक मंदिर—महादेव, गणेश, हनुमान, सूर्यदेव, अन्नपूर्णा आदि—भी पूरी तरह सजाए जाएंगे।

काशी के विद्वान गणेश्वर शास्त्री के मार्गदर्शन में अयोध्या, काशी और दक्षिण भारत के 108 वैदिक आचार्य अनुष्ठान संपन्न करेंगे।
सूर्य के निशान वाला भगवा ध्वज फहराया जाएगा—जो ऊर्जा, प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
विशेष शुभ मुहूर्त में होगा समारोह
PM मोदी 11:52 से 12:35 बजे के बीच ध्वजारोहण करेंगे। इसी दौरान अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा।
ध्वजारोहण के बाद वह पूजा-अर्चना और संबोधन करेंगे।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंचकर तैयारियों की समीक्षा की। पूरा प्रशासन सुरक्षा और व्यवस्था में जुटा है।
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22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा अधूरी बताई गई थी?
22 जनवरी 2024 को रामलला की पहली प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। तब मंदिर का निर्माण पूरी तरह पूरा नहीं था।
कुछ साधुओं ने इसे अधूरा बताया था।
जून 2025 में राम दरबार—राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान—की मूर्तियां स्थापित की गईं।
अब मंदिर पूरी तरह तैयार है। इसी कारण यह आयोजन दूसरी प्राण प्रतिष्ठा जैसा माना जा रहा है।
