इंडिगो एयरलाइन इन दिनों बड़े परिचालन संकट का सामना कर रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्थिति की पूरी जानकारी दी गई है और PMO सीधे इस पर नजर रख रहा है। बढ़ते उड़ान विलंब, क्रू की कमी और FDTL (Flight Duty Time Limit) नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने एयरलाइन से कड़ाई से जवाब मांगा है।

सूत्रों के अनुसार, नागर विमानन मंत्रालय ने इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों को हो रही परेशानी पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी दबाव के बीच इंडिगो प्रबंधन ने सरकार से 10 दिनों की मोहलत मांगी है ताकि वह क्रू प्रबंधन, उड़ान शेड्यूल और परिचालन सुधार की योजना को लागू कर सके।
सरकार FDTL नियमों के उल्लंघन को लेकर भी गंभीर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई पायलटों और क्रू ने आरोप लगाया है कि उन्हें लगातार ओवरटाइम में काम करना पड़ रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी तरह की सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया गया, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इंडिगो फिलहाल भारत की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन है और इसके किसी भी स्तर पर संकट का असर देशभर के हवाई यातायात पर पड़ता है। पिछले कुछ दिनों में कई उड़ानें देर से चलीं या रद्द करनी पड़ीं, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी हुई। PMO ने इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एयरलाइन से तात्कालिक सुधारात्मक कदम उठाने को कहा है।
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इंडिगो ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि वह क्रू रोस्टरिंग में बदलाव, पायलटों की अतिरिक्त भर्ती और तकनीकी टीम को मजबूत करने जैसे कदम जल्द लागू करेगी। अगले 10 दिनों में एयरलाइन की परिचालन क्षमता और सेवा गुणवत्ता में सुधार दिखाने का वादा भी किया गया है।
सरकार की नजर इस बात पर है कि इंडिगो कितनी जल्दी स्थिति को सामान्य करती है और यात्रियों की समस्याएं कम होती हैं।
