रात को सोते समय हम किस करवट सोते हैं, यह केवल आराम से जुड़ी आदत नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। आयुर्वेद और आधुनिक मेडिकल साइंस दोनों मानते हैं कि सोने की सही मुद्रा (Sleeping Position) पाचन, दिल, सांस और रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—लेफ्ट साइड सोना बेहतर है या राइट साइड?

बाईं करवट (Left Side) सोना क्यों माना जाता है सबसे अच्छा?
आयुर्वेद और वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, बाईं करवट सोना शरीर के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। इसकी सबसे बड़ी वजह पाचन तंत्र है। पेट का आकार थोड़ा बाईं ओर होता है, ऐसे में बाईं करवट सोने से खाना आसानी से छोटी आंत की ओर जाता है। इससे पाचन बेहतर होता है और एसिडिटी व सीने की जलन कम होती है।
दिल के मरीजों के लिए भी बाईं करवट सोना फायदेमंद माना जाता है। इससे दिल पर दबाव कम पड़ता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है। इसके अलावा शरीर का लिम्फेटिक सिस्टम, जो टॉक्सिन बाहर निकालने का काम करता है, बाईं तरफ ज्यादा एक्टिव होता है। इसलिए बाईं करवट सोने से शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया बेहतर होती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है लेफ्ट साइड सोना?
डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को हमेशा बाईं करवट सोने की सलाह देते हैं। इससे बच्चे तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की सप्लाई बेहतर होती है और मां के लीवर व किडनी पर दबाव कम रहता है।
खर्राटे और स्लीप एपनिया में किस साइड सोएं?
बाईं करवट सोने से वायुमार्ग खुला रहता है, जिससे खर्राटे और स्लीप एपनिया की समस्या कम हो सकती है।
दाईं करवट (Right Side) सोना कब ठीक है?
दाईं करवट सोने से कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स और हार्टबर्न की समस्या बढ़ सकती है। हालांकि, अगर किसी खास बीमारी में डॉक्टर ने दाईं करवट सोने की सलाह दी है, तो वही माननी चाहिए।
पीठ या पेट के बल सोना कितना सही?
पीठ के बल सोना रीढ़ के लिए ठीक है, लेकिन इससे खर्राटे बढ़ सकते हैं। वहीं पेट के बल सोने से गर्दन और कमर पर दबाव पड़ता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
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निष्कर्ष:
सामान्य स्वास्थ्य, बेहतर पाचन और दिल की सेहत के लिए लेफ्ट साइड सोना सबसे बेहतर माना जाता है। किसी भी पुरानी बीमारी में सोने की मुद्रा बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
