नेपाल में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी (यूएमएल) ने शनिवार को भक्तपुर में एक विशाल रैली का आयोजन किया। यह रैली चर्चित Gen Z आंदोलन के बाद पार्टी का पहला बड़ा शक्ति प्रदर्शन मानी जा रही है। इसी आंदोलन के चलते ओली सरकार का पतन हुआ था।

रैली को संबोधित करते हुए केपी शर्मा ओली ने संसद भंग किए जाने को “असंवैधानिक” करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने संसद की बहाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और न्यायपालिका से उन्हें सकारात्मक फैसले की उम्मीद है। ओली ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें जानबूझकर Gen Z युवाओं के विरोधी के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि वे युवाओं की भागीदारी और उनकी आवाज के समर्थक रहे हैं।
रैली में दिखा राजनीतिक जोश
भक्तपुर में हुई इस रैली में हजारों कार्यकर्ता और समर्थक जुटे। पार्टी के झंडों और नारों के बीच मंच से नेताओं ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधा। यूएमएल महासचिव शंकर पोखरेल ने कहा कि भले ही पार्टी सत्ता से बाहर हो, लेकिन जनता के दिलों में आज भी यूएमएल जीवित है। उन्होंने इसे जनसमर्थन का प्रमाण बताया।
पार्टी चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन
महासचिव पोखरेल ने जानकारी दी कि सोमवार को पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा, जिसमें 2000 से अधिक प्रतिनिधि मतदान करेंगे। इस चुनाव में केपी शर्मा ओली का मुकाबला पार्टी के उपाध्यक्ष ईश्वर पोखरेल से है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भक्तपुर रैली को आंतरिक चुनाव से पहले ओली की ताकत दिखाने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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नेपाल की राजनीति में नया मोड़
Gen Z आंदोलन के बाद नेपाल की राजनीति में युवाओं की भूमिका और प्रभाव तेजी से बढ़ा है। ओली की यह रैली संकेत देती है कि सत्ता से बाहर होने के बावजूद यूएमएल आने वाले समय में आक्रामक राजनीति की राह पर चल सकती है।
