भारत में सोना और चांदी केवल धातु नहीं, बल्कि परंपरा, आस्था और निवेश का अहम हिस्सा माने जाते हैं। चाहे धनतेरस हो, शादी-ब्याह का मौसम या कोई शुभ अवसर—सोना-चांदी खरीदना आम बात है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि सोनार हमेशा सोना और चांदी गुलाबी रंग के कागज में ही क्यों देता है? यह सवाल भले ही छोटा लगे, लेकिन इसके पीछे दिलचस्प वजह छिपी है।

अधिकतर लोग इसे महज एक परंपरा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन असल में गुलाबी कागज का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाता है। विशेषज्ञों और ज्वैलर्स के अनुसार, गुलाबी रंग सोना और चांदी की प्राकृतिक चमक को और निखार देता है। खासतौर पर चांदी, गुलाबी बैकग्राउंड पर ज्यादा चमकदार और आकर्षक दिखाई देती है, जिससे ग्राहक को धातु ज्यादा कीमती और सुंदर महसूस होती है।
इसके अलावा, रंगों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव की भी इसमें बड़ी भूमिका होती है। गुलाबी रंग को खुशी, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि शुभ अवसरों पर पैकिंग में इस रंग का इस्तेमाल ज्यादा होता है। जब ग्राहक गुलाबी कागज में लिपटा सोना या चांदी देखता है, तो उसे एक सकारात्मक और उत्सव जैसा अनुभव मिलता है।
एक व्यावहारिक कारण भी है। सोना और चांदी बेहद नाजुक धातुएं होती हैं, जिन पर आसानी से खरोंच या दाग लग सकता है। कागज इन्हें बाहरी नुकसान से बचाने का काम करता है। चूंकि कागज का इस्तेमाल करना ही है, इसलिए ऐसा रंग चुना जाता है जो सुरक्षा के साथ-साथ दिखने में भी बेहतर लगे।
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कुछ ज्वैलर्स का मानना है कि यह परंपरा सालों से चली आ रही है और अब यह ग्राहकों की आदत और अपेक्षा बन चुकी है। गुलाबी कागज में दिया गया आभूषण एक तरह से विश्वास और प्रामाणिकता का संकेत भी माना जाता है।
कुल मिलाकर, अगली बार जब आप सोना या चांदी खरीदें और सोनार उसे गुलाबी कागज में दे, तो समझ जाइए कि यह सिर्फ पैकिंग नहीं, बल्कि चमक, शुभता और सुरक्षा का संगम है।
