पश्चिम बंगाल में कविता उत्सव पर विवाद: साहित्यकारों ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
कोलकाता, 3 जून 2025 — साहित्यिक संस्कृति के लिए प्रसिद्ध पश्चिम बंगाल में इस बार कविता उत्सव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य प्रायोजित यह वार्षिक आयोजन वर्ष 2016 से पश्चिम बंगाल कविता अकादमी द्वारा नियमित रूप से आयोजित किया जाता रहा है, लेकिन इस वर्ष इसे रद्द कर दिया गया, जिससे राज्य के साहित्यिक समुदाय में गहरा असंतोष पैदा हो गया है।

इस आयोजन के स्थगन को लेकर अब गंभीर आरोप सामने आए हैं। राज्य के कई प्रसिद्ध कवियों और साहित्यकारों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुला पत्र लिखते हुए कविता अकादमी में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए हैं।
क्या है कविता उत्सव और क्यों है महत्वपूर्ण?
कविता उत्सव बंगाल की साहित्यिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। हर साल जनवरी से मार्च के बीच आयोजित होने वाला यह आयोजन न सिर्फ वरिष्ठ और युवा कवियों को मंच देता है, बल्कि यह कविता पाठ, विचार-विमर्श, पुस्तक विमोचन और साहित्यिक संवाद का केंद्र होता है।
पश्चिम बंगाल एकमात्र राज्य है जहाँ कविता के लिए अलग से एक सरकारी अकादमी की स्थापना की गई है — पश्चिम बंगाल कविता अकादमी। यही संस्था इस उत्सव का संचालन करती है।
क्यों नहीं हुआ आयोजन?
2025 में जब यह उत्सव नहीं हुआ, तो शुरुआत में इसे प्रशासनिक कारणों से जुड़ा माना गया। लेकिन जल्द ही एक रिपोर्ट में सामने आया कि आयोजन को कथित रूप से वित्तीय गड़बड़ियों और अकादमी की अंदरूनी खींचतान के चलते रद्द किया गया है।
इसके बाद कवियों के एक वर्ग ने विरोध दर्ज कराया और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की।
खुले पत्र में क्या कहा गया?
पत्र में कवियों ने लिखा:
“पश्चिम बंगाल कविता अकादमी — जो आपकी पहल पर स्थापित हुई थी — अब पारदर्शिता और निष्पक्षता से दूर होती जा रही है। वर्षों से असंतोष है, लेकिन इस बार कविता उत्सव का न होना यह दिखाता है कि हालात गंभीर हैं।”
इस पत्र पर कई वरिष्ठ कवियों के हस्ताक्षर हैं, जो राज्य की साहित्यिक दुनिया में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
क्या हैं आरोप?
अकादमी में भाई-भतीजावाद का बोलबाला
बजट खर्च में पारदर्शिता की कमी
आयोजन के लिए चयन प्रक्रिया में पक्षपात
युवा और स्वतंत्र कवियों को लगातार नजरअंदाज करना
साथ ही यह आरोप भी है कि अकादमी में साहित्य से अधिक राजनीति हावी हो गई है, जिससे रचनात्मकता और निष्पक्षता को नुकसान हो रहा है।
सरकार की चुप्पी और बढ़ता असंतोष
फिलहाल राज्य सरकार या कविता अकादमी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे नाराजगी और बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर भी कई कवियों ने इस विषय को उठाया है और #SaveKabitaUtsav जैसे हैशटैग चल रहे हैं।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है, और आरोप लगाया है कि राज्य सरकार साहित्यिक अभिव्यक्ति को दबा रही है।क्या मांग कर रहे हैं साहित्यकार?
कविता उत्सव को जल्द आयोजित किया जाए
अकादमी की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए
बजट और कार्यक्रम चयन में पारदर्शिता हो
अकादमी को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त किया जाए
अंतिम सवाल
पश्चिम बंगाल की साहित्यिक आत्मा का यह आयोजन रुकना केवल एक कार्यक्रम का बंद होना नहीं, बल्कि संस्कृति के प्रति गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देती है — और क्या बंगाल की कविता को उसका मंच दोबारा मिल पाएगा।
