कोलकाता: विश्व कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की एकमात्र ज्ञात मूर्तिकला ‘द हार्ट’ को शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित एक प्रमुख नीलामी कार्यक्रम में ₹1,04,52,210 में बेचा गया। इस अद्वितीय कलाकृति की अनुमानित कीमत ₹55 लाख से ₹70 लाख के बीच आंकी गई थी, लेकिन इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक अहमियत के कारण यह एक करोड़ से ज्यादा में नीलाम हुई।

यह मूर्ति सिर्फ एक कलाकृति नहीं, बल्कि टैगोर की निजी संवेदनाओं का प्रतीक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मूर्ति टैगोर की जीवन की महत्वपूर्ण हस्ती कादंबरी देवी को समर्पित हो सकती है, जिनसे वह भावनात्मक रूप से गहराई से जुड़े थे।

‘द हार्ट’ – एक दुर्लभ और भावनात्मक प्रतीक

‘द हार्ट’ रवींद्रनाथ टैगोर की अब तक ज्ञात एकमात्र मूर्तिकला है। इसे उन्होंने 20वीं सदी की शुरुआत में गढ़ा था, जब वे चित्रकला और अन्य कलात्मक विधाओं की ओर उन्मुख हो रहे थे। कला विशेषज्ञों का मानना है कि यह मूर्ति टैगोर के भीतर की संवेदनाओं और कष्टों का मूर्त रूप है।

हालांकि टैगोर मुख्यतः कविताएं, गीत, उपन्यास और चित्रकारी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन यह मूर्ति उनकी बहुआयामी कला प्रतिभा को सामने लाती है।

कादंबरी देवी से जुड़ा गहरा भाव

इतिहासकारों का अनुमान है कि यह मूर्ति टैगोर की भाभी और प्रेरणा स्रोत रहीं कादंबरी देवी के प्रति उनके भावनात्मक जुड़ाव की अभिव्यक्ति है। कादंबरी देवी का टैगोर के जीवन में विशेष स्थान था। उनकी अकाल मृत्यु ने टैगोर को गहरे रूप से प्रभावित किया था, और यह मूर्ति शायद उसी दुःख और प्रेम का प्रतीक है।

प्रसिद्ध टैगोर विशेषज्ञ डॉ. अमर नाथ चौधरी के अनुसार, “यह मूर्ति टैगोर की उस वेदना की अभिव्यक्ति हो सकती है जो उन्होंने कादंबरी देवी की मृत्यु के बाद अनुभव की। ‘द हार्ट’ एक ऐसा रचनात्मक प्रयास है जिसमें उनका दिल बोलता है।”

नीलामी में बिकीं टैगोर की 35 हस्तलिखित चिट्ठियां भी

इस नीलामी कार्यक्रम में रवींद्रनाथ टैगोर की 35 दुर्लभ हस्तलिखित चिट्ठियां भी ₹5.9 करोड़ में खरीदी गईं। इन पत्रों में टैगोर की निजी सोच, सामाजिक विचारधारा और साहित्यिक दृष्टिकोण का सजीव चित्रण देखने को मिलता है। इन पत्रों को विभिन्न संग्रहकर्ताओं और टैगोर प्रेमियों ने विशेष रूचि के साथ खरीदा।

नीलामी के आयोजक ‘टैगोर हेरिटेज एंड आर्ट’ के अनुसार, “यह आयोजन टैगोर की बहुआयामी कला की विरासत को समझने और संरक्षित करने का एक अभूतपूर्व प्रयास था। ‘द हार्ट’ और पत्रों की बिक्री ने साबित किया कि टैगोर न केवल साहित्य में, बल्कि दृश्य कला में भी अमर हैं।”

टैगोर की कला विरासत पर विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

कला समीक्षक और इतिहासकारों ने इस नीलामी को भारतीय कला के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि टैगोर जैसे सार्वकालिक कलाकार की विरासत का यह सम्मान भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करता है।

कला इतिहासकार उषा मिश्रा का कहना है, “टैगोर की यह मूर्ति न सिर्फ उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा है, बल्कि भारतीय आधुनिक कला आंदोलन में उनके योगदान को रेखांकित करती है। ‘द हार्ट’ अब केवल एक मूर्ति नहीं रही, यह टैगोर की आत्मा की आवाज बन गई है।”

‘द हार्ट’ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता

कलाकार: रवींद्रनाथ टैगोर

कृति का नाम: The Heart

काल: अनुमानतः 1920 के दशक

माध्यम: कांस्य या मिश्र धातु में निर्मित

नीलामी मूल्य: ₹1,04,52,210

संभावित प्रेरणा: कादंबरी देवी

नीलामी स्थल: कोलकाता

आयोजक: Tagore Heritage and Art Auction House

निष्कर्ष: टैगोर का हृदय आज भी जीवित है

‘द हार्ट’ की नीलामी यह प्रमाण है कि टैगोर की विरासत समय के साथ और भी अधिक प्रासंगिक होती जा रही है। उनकी कला केवल देखने की वस्तु नहीं, बल्कि अनुभव और आत्मानुभूति का माध्यम है। चाहे कविता हो, संगीत, चित्रकला या अब मूर्तिकला — टैगोर हर माध्यम में आत्मा की गहराइयों को छूते हैं।

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