पटना, 1 जुलाई 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है। ताजा विवाद तब भड़का जब पटना स्थित जनता दल (यूनाइटेड) कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों में पीएम मोदी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीरें कम नजर आ रही हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

विपक्ष ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और दावा किया है कि “नीतीश कुमार की मजबूरी बन गए हैं नरेंद्र मोदी।”

पटना के जेपी गोलंबर स्थित JDU मुख्यालय में हाल ही में लगाए गए नए पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रमुखता दी गई है। पोस्टरों पर भाजपा के चुनावी वादों और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को उजागर किया गया है, जबकि नीतीश कुमार की मौजूदगी बेहद सीमित है। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि बिहार में JDU पूरी तरह से भाजपा के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) के प्रवक्ता मृणाल शेखर ने इस मुद्दे को उठाते हुए तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, “JDU अब पूरी तरह मोदी पर निर्भर हो चुकी है। नीतीश कुमार की लोकप्रियता खत्म हो चुकी है और वे मजबूरी में पीएम मोदी के पोस्टर लगवा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यह संकेत है कि एनडीए में अंदरूनी कलह है और JDU अब भाजपा के कंधे पर बंदूक रखकर सत्ता में बने रहना चाहती है।

JDU की ओर से पलटवार करते हुए प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के नेता हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका चेहरा स्वाभाविक रूप से चुनाव प्रचार में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी दोनों विकास के प्रतीक हैं, और पोस्टर पर किसी को ज्यादा या कम दिखाना चुनावी रणनीति का हिस्सा है, न कि मजबूरी।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बिहार चुनाव में JDU की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है। भाजपा के मजबूत संगठन और मोदी की लोकप्रियता को देखते हुए JDU यह कोशिश कर रही है कि राष्ट्रीय चेहरे को सामने रखकर चुनावी लाभ उठाया जाए। कुछ विश्लेषक यह भी कहते हैं कि नीतीश कुमार ने हालिया वर्षों में कई बार राजनीतिक पाला बदला है और उनकी पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है। ऐसे में वे भाजपा के सहयोग से सत्ता में बने रहने की कोशिश में मोदी के चेहरे को आगे ला रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त बहस चल रही है। कुछ लोग इसे “JDU की हार मान लेना” बता रहे हैं, वहीं कई समर्थक कह रहे हैं कि “मोदी और नीतीश की जोड़ी ही बिहार को स्थिरता दे सकती है।” ट्विटर पर ट्रेंड हो रहे हैं हैशटैग: #NitishKiMajboori #ModiInJDUPoster #BiharElection2025

आरजेडी समेत पूरा महागठबंधन यह दावा कर रहा है कि भाजपा और JDU के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। विपक्ष का कहना है कि नीतीश कुमार अपने दम पर चुनाव लड़ने का आत्मविश्वास खो चुके हैं। वहीं, NDA के नेता इसे “सुविचारित रणनीति” बता रहे हैं, जहां “लोकल + नेशनल” अप्रोच के जरिए वोटरों को साधा जा रहा है।

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार हमेशा से “पावर सेंटर” के रूप में रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में उनके कद में गिरावट आई है, और भाजपा का दबदबा बढ़ा है। अगर JDU वास्तव में मोदी के चेहरे के सहारे चुनाव लड़ती है, तो इसका असर नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर JDU को इस चुनाव में अपेक्षित सीटें नहीं मिलीं, तो भाजपा का दबाव और बढ़ सकता है, और आने वाले समय में नीतीश का राजनीतिक भविष्य और भी अस्थिर हो सकता है।

JDU दफ्तर में पीएम मोदी के पोस्टर लगना एक छोटी घटना लग सकती है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ बहुत बड़े हैं। यह घटना बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों और नीतीश कुमार की मौजूदा स्थिति को उजागर करती है। विपक्ष जहां इस मुद्दे को लेकर हमलावर है, वहीं NDA इसे एक सामान्य रणनीति बता रहा है। असली तस्वीर तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे, लेकिन एक बात साफ है – बिहार की सियासत में अब हर पोस्टर के पीछे एक कहानी छिपी होती है।

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