औरंगाबाद कलेक्ट्रेट हमला केस में बड़ा फैसला

बिहार के औरंगाबाद में 14 साल पुराने चर्चित कलेक्ट्रेट हमला और आगजनी मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने राजाराम सिंह, पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह समेत कुल 23 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

2012 का मामला, गांधी मैदान से शुरू हुआ था प्रदर्शन

यह मामला वर्ष 2012 का है, जब हसपुरा प्रखंड के सोनहथु पंचायत के पूर्व मुखिया की हत्या के विरोध में गांधी मैदान से प्रदर्शन निकाला गया था। आरोप था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन बाद में उग्र हो गया और भीड़ औरंगाबाद स्थित समाहरणालय की ओर बढ़ी।

पत्थरबाजी, आगजनी और गंभीर धाराएं

एफआईआर के अनुसार समाहरणालय गेट पर पत्थरबाजी, लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई हुई। सरकारी वाहनों में आगजनी का आरोप लगा। इस मामले में आईपीसी, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सरकारी संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।

सरकार जाएगी हाईकोर्ट

करीब एक दशक चले ट्रायल में अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए, लेकिन अदालत ने साक्ष्य अपर्याप्त मानते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। सरकार की ओर से लोक अभियोजक ने फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

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