
पटना न्यूज: बिहार सरकार ने राज्य में मांस बिक्री को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब केवल लाइसेंसधारी दुकानदारों को ही निर्धारित नियमों के तहत मांस बेचने की अनुमति होगी, जबकि खुले और सार्वजनिक स्थानों पर बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
बिहार में मांस की बिक्री और उससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर प्रशासन ने नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। राज्य के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से खुले में मांस बिक्री और बिना लाइसेंस दुकानों की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नगर निकायों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
नए निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी व्यक्ति या दुकानदार को बिना वैध लाइसेंस के मांस बेचने की अनुमति नहीं होगी। यह लाइसेंस बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 345 के अंतर्गत नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत द्वारा जारी किया जाएगा।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल लाइसेंस प्राप्त होना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बिक्री की प्रक्रिया भी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। दुकानों पर मांस इस तरह प्रदर्शित नहीं किया जा सकेगा कि वह बाहर से राहगीरों या ग्राहकों को दिखाई दे।
इसके तहत “नो-विजिबिलिटी नियम” लागू किया गया है, जिसके अनुसार मांस की दुकानें काले पर्दे, टिंटेड ग्लास या अन्य उपयुक्त आवरण का उपयोग करेंगी। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों पर दृश्य असुविधा को रोकना और स्वच्छता मानकों को बनाए रखना है।
पुलिस और नगर प्रशासन ने बताया कि यह कदम बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, “राज्य भर में मांस बिक्री को लेकर एकरूपता और अनुशासन लाने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। सभी नगर निकायों को निरीक्षण और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।”
बीते कुछ वर्षों में राज्य के कई जिलों में खुले में मांस काटने और बेचने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे न केवल स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हुईं, बल्कि कई स्थानों पर यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई।
नगर प्रशासन को इस संबंध में नागरिकों से शिकायतें मिलती रही हैं, जिसमें फुटपाथों, साप्ताहिक बाजारों और सार्वजनिक चौराहों पर खुले में मांस बिक्री की बात सामने आई। इन्हीं कारणों से सरकार ने मौजूदा कानूनी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्णय लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लाइसेंस व्यवस्था से न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि नगर क्षेत्रों में स्वच्छता मानकों में भी सुधार आएगा।
वर्तमान में सभी नगर निगमों और नगर परिषदों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मांस विक्रेताओं का सत्यापन करें। बिना लाइसेंस संचालित दुकानों की पहचान कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना, सामान की जब्ती और गंभीर मामलों में दुकान को स्थायी रूप से बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों पर खुले में मांस काटते या बेचते पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में नियमित निरीक्षण अभियान चलाए जाएंगे, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए ये दिशा-निर्देश मांस बिक्री को व्यवस्थित, नियंत्रित और स्वच्छ बनाने की दिशा में एक प्रशासनिक कदम माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इसका प्रभाव नगर क्षेत्रों की स्वच्छता, सार्वजनिक व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर देखने को मिल सकता है।
