दिल्ली की हवा में रविवार को हल्का सुधार दर्ज किया गया। कई इलाकों में AQI 400 से नीचे आया है।
औसत AQI सुबह 6:05 बजे 270 दर्ज हुआ, जो ‘Poor’ श्रेणी में आता है।
लगातार 16 दिनों बाद राजधानी को मामूली राहत मिली है।

लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं—यह राहत अस्थायी है। प्रदूषण का असली खतरा अभी खत्म नहीं हुआ।


वाहनों का प्रदूषण सबसे बड़ा कारण

विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण में वाहनों का योगदान सबसे ज्यादा है।
वाहनों से होने वाला प्रदूषण लगभग 35% तक है और यह पूरे साल रहता है।

पराली और पटाखों का योगदान बहुत कम है।
सर्दी में प्रदूषण थोड़ा बढ़ता है, लेकिन यह मुख्य कारण नहीं है।


धुंध और ठंड ने बढ़ाई मुश्किलें

दिल्ली की सुबहें अब धुंध और धुएं का मिश्रण लेकर आ रही हैं।
हवा में मौजूद ज़हरीले कण लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहे हैं।
सांस, आंख और फेफड़े संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।


क्यों आया मामूली सुधार?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार—

  • हवा की दिशा में बदलाव
  • हवा की रफ्तार बढ़ना
  • पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने में गिरावट

इन वजहों से AQI थोड़ा सुधरा है।

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स्काईमेट वेदर के वाइस प्रेसिडेंट महेश पलावत ने कहा:
“अगले दो दिनों तक हवा की गति तेज रहेगी। AQI ‘Severe’ श्रेणी में नहीं जाएगा। लेकिन सुधार धीरे-धीरे होगा।”

By ARPITA SARKAR

पत्रकारिता में करीब 2 साल का अनुभव रखने वाली अर्पिता सरकर, वर्तमान में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में BJMC की छात्रा हैं। उन्होंने कंटेंट राइटिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में दो साल काम किया है, विभिन्न डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लेख व वीडियो स्क्रिप्ट तैयार की हैं। अर्पिता भारतीय राजनीति, सामाजिक मुद्दे और क्राइम रिपोर्टिंग पर पैनी नजर रखती हैं।

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