दिल्ली में हुए ताज़ा ब्लास्ट ने राजधानी को दहला दिया है। घटना के बाद शहर में सुरक्षा बेहद सख्त कर दी गई है। पुलिस, स्पेशल सेल और बम निरोधक दस्ते लगातार गश्त कर रहे हैं।

बाजारों, मेट्रो स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में चेकिंग बढ़ा दी गई है। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था जितनी कड़ी हो रही है, उतना ही पीड़ित परिवारों का इंतज़ार भी लंबा होता जा रहा है। कई घायल अब भी अस्पतालों में हैं और कई परिवार अपने घरों और दुकानों के नुकसान से जूझ रहे हैं। सरकार ने मुआवज़े की घोषणा तो कर दी है, लेकिन ज़मीन पर सहायता अब तक नहीं पहुंची है।
पीड़ितों का कहना है कि इलाज और रोज़मर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, पर आर्थिक मदद का कुछ पता नहीं। स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी राहत में देरी पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि सुरक्षा बढ़ाना जरूरी है, लेकिन पीड़ितों को तुरंत सहायता मिलनी चाहिए। कई संगठनों ने अपनी तरफ़ से राशन, दवाइयाँ और ज़रूरी सामान दिया है, पर सरकारी मदद का इंतज़ार अब भी जारी है।
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जांच एजेंसियों ने इस ब्लास्ट को एक योजनाबद्ध साजिश बताया है, जिसके बाद राजधानी हाई अलर्ट पर है। पर लोगों की मांग साफ है—सुरक्षा भी जरूरी, पर मुआवज़ा सबसे पहले मिलना चाहिए।
