टीएमसी की राज्यसभा सांसद ममता बाला ठाकुर की भूख हड़ताल खत्म हो गई है। वह लगातार 13 दिनों से अनशन पर थीं। सोमवार को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें ठाकुरबाड़ी स्थित मंच पर ही स्लाइन चढ़ानी पड़ी। बाद में डॉक्टरों ने उन्हें बंगो सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती किया।

ममता बाला ठाकुर मतुआ समुदाय की प्रमुख नेता हैं। वह पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर प्रक्रिया का विरोध कर रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से मतुआ समुदाय के लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
रविवार को राज्य की उद्योग मंत्री शशि पांजा और टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी उनसे मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील की। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद परिवार और समुदाय ने भी अनशन रोकने का अनुरोध किया।
मतुआ समुदाय के लोगों में एसआईआर को लेकर चिंता बढ़ी है। उन्हें डर है कि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। समुदाय को आशंका है कि उन्हें बांग्लादेश लौटने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इसी कारण यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है।
इस स्थिति ने बीजेपी और टीएमसी दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। मतुआ वोट बैंक बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभाता है। एसआईआर को लेकर उठी आशंकाओं ने दोनों दलों की रणनीति को प्रभावित किया है।
ममता बाला ठाकुर ने कहा कि उनका आंदोलन समुदाय की आवाज उठाने के लिए था। उन्होंने मांग की कि सरकार और चुनाव आयोग एसआईआर पर स्पष्टता दें। उनका कहना है कि किसी भी नागरिक को डर में नहीं रहना चाहिए।
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फिलहाल डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर नजर रख रही है। पार्टी ने कहा है कि वह उनके साथ खड़ी है और समुदाय की चिंता को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
