पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा उठी है। बिहार में एसआईआर को लेकर चल रही बीजेपी और टीएमसी की बयानबाज़ी अब बंगाल तक पहुंच गई है। इसी बीच बीजेपी की पश्चिम बंगाल यूनिट चुनाव आयोग के दरवाज़े पर पहुंची और एक बड़ा दावा सामने रखा। पार्टी के बंगाल प्रभारी अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि राज्य में 88 लाख से अधिक मृत वोटर अब भी मतदाता सूची में शामिल हैं। उनका कहना है कि अगर यह आंकड़ा सच है, तो राज्य की राजनीति में एक बड़े भूचाल से इनकार नहीं किया जा सकता।

बीजेपी का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी वोटर लिस्ट में बने रहने से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होती है। मालवीय का दावा है कि पार्टी ने विस्तृत दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंप दिए हैं, जिसमें मृत और अनुपस्थित वोटरों की सूची शामिल है। उनका कहना है कि वोटर सूची को तुरंत साफ किया जाना चाहिए और सभी फर्जी नाम हटाए जाने चाहिए।

उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी ने इस दावे को “राजनीतिक साजिश” बताया है। टीएमसी का आरोप है कि बीजेपी जानबूझकर लोगों के नाम कटवाने की कोशिश कर रही है ताकि चुनावों में लाभ उठाया जा सके। पार्टी नेताओं ने कहा कि बीजेपी बिना तथ्य के विवाद पैदा कर रही है।

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बीजेपी का तर्क है कि अगर मृत वोटरों के नाम हटाए गए तो राज्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। वहीं टीएमसी कहती है कि यह सिर्फ चुनाव से पहले माहौल बनाने की कोशिश है। चुनाव आयोग ने मामले की शिकायत प्राप्त कर ली है और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बंगाल की राजनीति में ये नया विवाद आने वाले चुनावों की गरमाहट को और बढ़ा रहा है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग की जांच क्या दिशा लेती है और यह मुद्दा राज्य की राजनीति को कितना प्रभावित करता है।

By ARPITA SARKAR

पत्रकारिता में करीब 2 साल का अनुभव रखने वाली अर्पिता सरकर, वर्तमान में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में BJMC की छात्रा हैं। उन्होंने कंटेंट राइटिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में दो साल काम किया है, विभिन्न डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लेख व वीडियो स्क्रिप्ट तैयार की हैं। अर्पिता भारतीय राजनीति, सामाजिक मुद्दे और क्राइम रिपोर्टिंग पर पैनी नजर रखती हैं।

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