पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। राज्य में अब तक करीब 14 लाख SIR फॉर्म ‘अनकलेक्टेबल’ बताए गए हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

इन फॉर्म्स को इसलिए अनकलेक्टेबल माना गया क्योंकि जिन लोगों के नाम हैं, वे मौके पर नहीं मिले, उनके पते गलत पाए गए या वे किसी और जगह शिफ्ट हो चुके थे। कई मामलों में डुप्लीकेट एंट्री भी मिली है।
सोमवार को यह संख्या 10 लाख से थोड़ी अधिक थी। मंगलवार तक यह बढ़कर लगभग 14 लाख हो गई। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है, इसलिए यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
राज्य में इस SIR ड्राइव के लिए बड़ी टीम काम कर रही है। हजारों BLOs और सुपरवाइजर्स घर-घर जाकर वेरिफिकेशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि काम का दबाव बहुत ज्यादा है और समय बहुत कम दिया गया है। इस वजह से कई जगह विरोध की स्थिति भी बन गई है।
बीते कुछ दिनों में कई BLOs ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि उन्हें सुरक्षा नहीं दी जा रही। साथ ही जांच का बोझ असामान्य रूप से बढ़ा दिया गया है। इससे काम सही तरीके से नहीं हो पा रहा है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। बंगाल सरकार का कहना है कि बड़ी संख्या में फॉर्म को अनकलेक्टेबल बताना संदिग्ध है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल मतदाता सूची में से नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। विपक्ष इसे “वोटर लिस्ट की सफाई” बता रहा है।
जनता में भी डर बढ़ गया है। कई लोग चिंतित हैं कि कहीं उनके नाम भी मतदाता सूची से न हट जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि SIR प्रक्रिया बेहद संवेदनशील है और इसमें पारदर्शिता जरूरी है।
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फिलहाल फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख में एक हफ्ता बाकी है। जिन लोगों तक BLO नहीं पहुंचे हैं, उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। नाम कटने का खतरा तभी टलेगा जब SIR प्रक्रिया पूरी तरह साफ और निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी।
