इंडिया की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo के लिए 5 दिसंबर 2025 का दिन अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण दिन साबित हुआ, जब एयरलाइन को मजबूरी में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। यह संख्या सिर्फ एक दिन में किसी भी भारतीय एयरलाइन द्वारा रद्द की गई अब तक की सबसे बड़ी संख्या में से एक है। देशभर के हवाईअड्डों—दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई पर हजारों यात्री फंसे रहे, जहां लंबी लाइनें, गुस्सा, शिकायतें और भारी अव्यवस्था देखने को मिली। इन नियमों के तहत पायलटों और केबिन क्रू के आराम के घंटे बढ़ा दिए गए, रात की ड्यूटी पर सीमाएँ लगाई गईं और ड्यूटी शेड्यूलिंग में सख्ती की गई। परिणाम इंडिगो जैसे विशाल नेटवर्क पर अचानक बड़े पैमाने पर क्रू की उपलब्धता गड़बड़ा गई और पूरी ऑपरेशनल संरचना असंतुलित हो गई।

IndiGo के CEO पीटर एल्बर्स ने वीडियो संदेश जारी कर इस संकट को “अप्रत्याशित और कठिन” बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि 5 दिसंबर कंपनी के लिए “सबसे खराब दिन” रहा, क्योंकि आधे से अधिक फ्लाइट ऑपरेशन्स को रद्द करना पड़ा। एल्बर्स ने यात्रियों से माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी। उनके अनुसार, 10 से 15 दिसंबर के बीच एयरलाइन के अधिकतर ऑपरेशन्स सामान्य हो जाएंगे और क्रू शेड्यूलिंग की समस्या काफी हद तक संतुलित हो जाएगी। उन्होंने यह भी अपील की कि जिन यात्रियों की उड़ान रद्द हो चुकी है, वे एयरपोर्ट न जाएँ और पहले अपनी उड़ान की स्थिति ऑनलाइन चेक करें।
इस संकट ने भारतीय एविएशन सेक्टर पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने व्यापक नियम परिवर्तन के बावजूद एयरलाइन और नियामक संस्थाओं ने पर्याप्त तैयारी नहीं की। ऐसे समय में जब त्योहारों और शादी के मौसम में यात्रियों की संख्या बढ़ी हुई रहती है, अचानक से क्रू-ड्यूटी बदलाव ने इंडिगो के पूरे शेड्यूल को चरमरा दिया। DGCA पर भी यह सवाल उठ रहा है कि उसने एयरलाइंस को पर्याप्त समय और दिशानिर्देश क्यों नहीं दिए, ताकि वे नए सिस्टम के अनुरूप अपनी आंतरिक नीति और स्टाफिंग पहले से तैयार कर पातीं।
इधर, यात्रियों का गुस्सा सोशल मीडिया पर भी फूट पड़ा। कई यात्रियों ने यह शिकायत की कि उड़ानें आखिरी समय में रद्द की गईं, जिसके कारण उन्हें होटल बुकिंग, व्यापारिक मीटिंग और महत्वपूर्ण यात्राएँ रद्द करनी पड़ीं। कुछ यात्रियों का यह भी कहना है कि उन्हें मुआवजा या वैकल्पिक यात्रा की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही। एयरलाइन ने हालांकि दावा किया है कि प्रभावित यात्रियों को रिफंड, रीबुकिंग या विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति की गंभीरता देखते हुए यह कदम कई लोगों के लिए पर्याप्त नहीं दिखा।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि भारत के एविएशन सेक्टर को अचानक बदलावों के लिए कितनी तैयारी की आवश्यकता है। एक ही एयरलाइन की दिक्कत ने पूरे देश की उड़ान व्यवस्था को हिला दिया—कनेक्टिंग फ्लाइट्स छूटीं, कई रूट्स पर किराए अचानक बढ़ गए, और एक श्रंखला प्रभाव (domino effect) के कारण अन्य एयरलाइंस पर भी दबाव बढ़ गया। इंडिगो, जो रोजाना लगभग 2000 उड़ानें संचालित करती है, उसकी इतनी बड़ी संख्या में रद्दीकरण का असर अनिवार्य रूप से पूरे नेटवर्क पर पड़ा।
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अब एयरलाइन के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने नेटवर्क को स्थिर करना है। CEO ने आश्वस्त किया है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति बेहतर होती जाएगी, लेकिन यात्रियों और एविएशन इंडस्ट्री दोनों के मन में यह सवाल कायम है कि इतने बड़े बदलाव के बावजूद ऐसी स्थिति को पहले से नियंत्रित क्यों नहीं किया गया। यह संकट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि भारत की तेजी से बढ़ती हवाई यात्रा मांग और एविएशन इकोसिस्टम को अचानक आने वाली परिस्थितियों के लिए और मजबूत और व्यवस्थित होने की आवश्यकता है।
