बिहार की नई एनडीए सरकार में सत्ता संतुलन को लेकर बड़ी चर्चा तेज है। इसकी वजह है — गृह विभाग का जिम्मा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बजाय उनके डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दिया जाना। बिहार की राजनीति में यह स्थिति पहली बार देखने को मिली है।
आमतौर पर देश के लगभग हर राज्य में गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास होता है। लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। बीजेपी को 89 सीटें मिलने के बाद पार्टी की ताकत बढ़ी और इसी बदले हुए समीकरण में सम्राट चौधरी को गृह मंत्री बनाया गया। लेकिन बड़ा सवाल यह है —
क्या सम्राट चौधरी के पास IAS-IPS अधिकारियों की पूरी ट्रांसफर-पोस्टिंग की शक्तियां होंगी?

ट्रांसफर–पोस्टिंग का असली पावर सेंटर कौन?
गृह विभाग के पास पुलिस व्यवस्था का सीधा नियंत्रण होता है। लेकिन बिहार में एक और विभाग बेहद महत्वपूर्ण है — सामान्य प्रशासन विभाग (GAD)।
यह विभाग सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास है।
सामान्य प्रशासन विभाग ही तय करता है कि
- किस IAS को कहां पोस्ट किया जाए
- कौन सा IPS नई जिम्मेदारी संभालेगा
- कौन SP, IG, ADG बनेगा
यानी स्पष्ट है —
गृह विभाग सम्राट चौधरी के पास है, लेकिन IAS–IPS अफसरों की नियुक्ति का अंतिम अधिकार अभी भी नीतीश कुमार के पास ही रहेगा।
सम्राट चौधरी अपने विभाग से संबंधित सिफारिश जरूर देंगे, लेकिन किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के ट्रांसफर या पोस्टिंग का अंतिम आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ही जारी करेगा।
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क्या दोनों में टकराव संभव?
बिहार में मंत्री–अफसर टकराव पहले भी दिख चुका है।
महागठबंधन सरकार में शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और ACS केके पाठक के बीच खुली तनातनी इसका बड़ा उदाहरण है।
ऐसे में गृह विभाग के संचालन के दौरान भी समन्वय की परीक्षा होगी।
सियासत में बढ़ी हलचल
राजनीतिक जानकार इसे दो तरह से देख रहे हैं—
- नीतीश की पकड़ कमजोर हो रही है, इसलिए गृह विभाग छोड़ा गया।
- बीजेपी की हिस्सेदारी बढ़ी है, इसलिए सम्राट को अहम मंत्रालय मिला।
लेकिन प्रशासनिक ढांचे की हकीकत साफ है—
सम्राट चौधरी गृह मंत्री हैं, पर ट्रांसफर-पोस्टिंग पर अंतिम मुहर नीतीश कुमार की ही रहेगी।
