पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर सियासत लगातार तेज हो रही है।
जलपाईगुड़ी के माल ब्लॉक में एक बीएलओ की खुदकुशी ने मामला और गरमा दिया है।

लतागुड़ी ग्राम पंचायत की आंगनवाड़ी वर्कर और बूथ लेवल ऑफिसर रीना रॉय (42) मंगलवार रात अपने घर में फांसी पर लटकी मिलीं।
परिवार का कहना है कि वह पिछले 15 दिनों से एसआईआर के काम में लगी थीं।
रोज फील्ड विजिट।
ऊपर से लगातार दबाव।
और धमकी भरे फोन।
इन सबने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।
घटना सामने आते ही बंगाल की राजनीति उबलने लगी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि यह “चुनाव आयोग की अमानवीय नीति” का नतीजा है।
ममता ने दावा किया कि एसआईआर शुरू होने के बाद अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है।
कुछ डर के कारण।
कुछ तनाव और ओवरवर्क की वजह से।
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर भी अपनी बात रखी।
उन्होंने लिखा कि “आज फिर एक कीमती जान गई।”
साथ ही एसआईआर को तुरंत रोकने की मांग की।
चुनाव आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है।
आयोग ने जलपाईगुड़ी प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है।
राज्य सरकार और केंद्र के बीच इस मुद्दे पर टकराव बढ़ सकता है।
बीएलओ और सरकारी कर्मचारियों के संगठन भी सक्रिय हो गए हैं।
कई कर्मचारी लगातार ओवरवर्क और दबाव की शिकायत करते रहे हैं।
अब बीएलओ की मौत के बाद यह मुद्दा और बड़ा हो गया है।
एसआईआर के दौरान हजारों कर्मचारियों को घर-घर जाकर सत्यापन करना पड़ रहा है।
कई इलाकों में असुरक्षा और तनाव की स्थिति बनी हुई है।
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बंगाल में इस घटना ने नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
अब अगले कुछ दिनों में चुनाव आयोग और राज्य सरकार क्या कदम उठाएंगे, इस पर नजर रहेगी।
