बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बच्चों में किताब पढ़ने की आदत को विकसित करने के उद्देश्य से पटना जिले के सरकारी माध्यमिक स्कूलों में एक नई रचनात्मक पहल की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत छात्रों को न केवल किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा, बल्कि उन्हें लेखन, संपादन और सृजनशील गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा।

जिला शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चों में वैचारिक और तार्किक सोच विकसित करने के लिए पढ़ने की आदत बेहद आवश्यक है। इसी दिशा में प्रत्येक माध्यमिक विद्यालय में स्कूल मैगजीन तैयार की जाएगी, जिसका संपादन पूरी तरह छात्रों द्वारा ही किया जाएगा। यह कदम छात्रों की लिखने की क्षमता और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस योजना के तहत बच्चों को नए-नए विचारों के साथ मैगजीन में कविताएं, कहानियां, लेख और चित्रकारी शामिल करने का मौका मिलेगा। साथ ही, छात्रों को रचनात्मक बुकमार्क बनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। जो बच्चे बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे, उन्हें विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा, जिससे उनमें आगे बढ़ने का उत्साह और बढ़ेगा।
वहीं शिक्षकों को भी इस योजना का सक्रिय हिस्सा बनाया गया है। उन्हें बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए किताबों पर चर्चा कराने, कहानी लेखन सत्र आयोजित करने और पुस्तकों पर आधारित क्विज प्रतियोगिताएं करवाने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य है—स्कूलों में पठन-पाठन की संस्कृति को सशक्त बनाना।
बिहार की और खबरें पढ़ें: Click here
जिले के सभी स्कूलों में पाठ्यक्रम के अलावा साहित्यिक और सामान्य ज्ञान से जुड़ी किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। स्कूलों की लाइब्रेरी को नए सिरे से विकसित किया जाएगा, जिससे बच्चों को कहानी, उपन्यास, जीवनी, प्रेरणादायी साहित्य और सामान्य ज्ञान की किताबें आसानी से मिल सकें।
शिक्षा विभाग का कहना है कि यदि बच्चों में बचपन से ही किताब पढ़ने की आदत विकसित हो जाए, तो यह न केवल उनकी शिक्षा में सुधार लाती है बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास में भी मदद करती है।
