झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी पर एक बार फिर खतरा मंडरा रहा है।
झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया।
कोर्ट ने MP/MLA अदालत द्वारा दिए गए निजी रूप से पेश होने के आदेश पर लगी रोक हटा दी है।

यह फैसला मुख्यमंत्री के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
क्योंकि अब उन्हें निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है।

यह मामला जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस से संबंधित है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2024 में इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।

ईडी ने कहा कि मुख्यमंत्री को पेश होने के लिए 10 समन भेजे गए थे।
लेकिन हेमंत सोरेन सिर्फ दो बार ही एजेंसी के सामने उपस्थित हुए।
बाकी 8 समन को कथित रूप से अनदेखा किया गया।

इसी आधार पर ईडी ने विशेष अदालत में शिकायत दाखिल की थी।
अदालत ने सीएम को निजी रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था।
इसी आदेश को चुनौती देने के लिए मुख्यमंत्री हाईकोर्ट पहुंचे थे।

अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि निचली अदालत का आदेश वैध है।
रोक हटाने के बाद मुख्यमंत्री की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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राजनीतिक बयानबाजी शुरू

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
बीजेपी नेताओं ने कहा कि “मुख्यमंत्री को कोर्ट का सम्मान करना चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जांच से बचना चाहते हैं।

वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) इसे राजनीतिक साजिश बता रहा है।
उनका कहना है कि विपक्ष सरकार को घेरने के लिए जांच एजेंसी का इस्तेमाल कर रहा है।

लेकिन अदालत के ताजा फैसले के बाद मामला फिर गरम हो गया है।
राजनीतिक हलचल तेज है और कानूनी मोर्चे पर भी बड़ा दबाव बढ़ गया है।

By ARPITA SARKAR

पत्रकारिता में करीब 2 साल का अनुभव रखने वाली अर्पिता सरकर, वर्तमान में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में BJMC की छात्रा हैं। उन्होंने कंटेंट राइटिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में दो साल काम किया है, विभिन्न डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लेख व वीडियो स्क्रिप्ट तैयार की हैं। अर्पिता भारतीय राजनीति, सामाजिक मुद्दे और क्राइम रिपोर्टिंग पर पैनी नजर रखती हैं।

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