पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR (Special Identification Record) पर खुला चैलेंज देकर विपक्ष और केंद्र पर निशाना साधा था। लेकिन अब सीमावर्ती जिलों के ताज़ा आंकड़े उन्हीं की मुश्किलें बढ़ाते दिख रहे हैं।

ममता ने दावा किया था कि SIR से राज्य की जनसंख्या संरचना को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और कुछ एजेंसियां इस डेटा का “गलत राजनीतिक उपयोग” कर रही हैं।
मगर ताज़ा रिपोर्टों ने स्थिति बदल दी है।
सीमावर्ती जिलों के आंकड़ों ने बढ़ाई सरकार की चिंता
बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, नादिया, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर जैसे जिलों के आंकड़े तेजी से चर्चा में हैं।
इन इलाकों में पिछले वर्षों में असामान्य जनसंख्या वृद्धि और सामाजिक–आर्थिक असंतुलन दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- सीमावर्ती इलाकों में जनसंख्या वृद्धि राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक
- कई ब्लॉक्स में 25–30% तक बढ़ोतरी
- प्रशासन की रिपोर्ट में बॉर्डर मूवमेंट और अनियमित प्रवास का जिक्र
इसी ने SIR के मुद्दे को और गर्म कर दिया है।
ममता का पलटवार—but आंकड़े दे रहे विपरीत संकेत
ममता बनर्जी कहती हैं कि ये आंकड़े ‘‘राजनीतिक प्रोपेगेंडा’’ का हिस्सा हैं।
उन्होंने चुनौती दी—
“अगर किसी में हिम्मत है तो SIR का एक भी आंकड़ा साबित करके दिखाएं।”
लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि फील्ड डेटा खुद सबूत बना हुआ है।
केंद्र बनाम राज्य—विवाद और गहरा
केंद्र सरकार SIR को सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के लिए अहम मानती है।
वहीं ममता सरकार इसे ‘‘राज्य के अधिकारों में दखल’’ बताती रही है।
बॉर्डर जिलों में बढ़ती जनसांख्यिकीय बदलाव पर केंद्र पहले ही चिंता जताता रहा है।
न्यूज़ रिपोर्ट बताती हैं कि कई विभागों की आंतरिक रिपोर्ट ममता सरकार के दावों को चुनौती देती है।
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विवाद का राजनीतिक असर
इस मुद्दे ने बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है।
- विपक्ष कह रहा है कि आंकड़े सबूत हैं कि ममता ने असली स्थिति छुपाई
- TMC का दावा—केंद्र SIR को हथियार बनाकर डर पैदा कर रहा है
लोकसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा बंगाल में “इलेक्शन नैरेटिव” बनता दिख रहा है।
