प्रसिद्ध धार्मिक गुरु प्रेमानंद जी महाराज की सेहत हाल-फिलहाल उनकी अनुयायियों को चिंतित कर रही है। कहा जा रहा है कि उन्हें पॉलीसिस्टिक किडनी डिज़ीज़ (PKD) नामक अनुवांशिक रोग है, जिसके कारण उनकी दोनों किडनियों में पानी से भरे सिस्ट बन गए हैं। समय के साथ उनकी किडनियाँ धीरे-धीरे असफल हो गई हैं और वे नियमित डायलिसिस पर निर्भर हो गए हैं।

महाराज के कई वीडियो सोशल मीडिया पर देखे गए हैं, जहाँ वे बताते हैं: “दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं, अब ठीक होने की संभावना बहुत कम है।” उनकी यह स्थिति उनके भक्तों के लिए बेहद दुखद है, क्योंकि वे अक्सर कहते हैं, “आज नहीं तो कल जाकर मिलना ही होगा।”
किडनी का मुख्य काम शरीर के खून को फिल्टर करना और वेस्ट पदार्थों को पेशाब के ज़रिए बाहर निकालना होता है। जब यह फ़िल्टरिंग सिस्टम काम करना बंद कर दे, तो उसे किडनी फेलियर कहा जाता है। यह दो तरह का हो सकता है: अचानक (एक्यूट किडनी फेलियर) और धीरे-धीरे बढ़ने वाला (क्रोनिक किडनी फेलियर)।
उनके मामले में यह दूसरा प्रकार माना जाता है, जो एंड-स्टेज किडनी डिज़ीज़ (ESKD) की स्थिति तक पहुँच गया है। यह बीमारी तब जीवन के लिए खतरनाक हो जाती है, जब किडनियाँ पूरी तरह अपनी फ़िल्टरिंग क्षमता खो बैठें।
चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि PKD एक जीन-आधारित रोग है। इसमें दोनों किडनियों में सिस्ट बन जाते हैं, जो धीरे-धीरे बढ़ते हैं। जैसे-जैसे सिस्ट बढ़ते हैं, किडनियाँ अपना काम सुचारू रूप से नहीं कर पातीं। समय पर डायलिसिस और नियमित मेडिकल चेकअप ही इसे नियंत्रित करने का तरीका है।
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प्रेमानंद महाराज की बीमारी ने उनके अनुयायियों को विशेष रूप से चिंता में डाल दिया है। उनके समर्थक दुआ करते हैं कि वे जल्द स्वस्थ हों। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ उन्हें यह सलाह देते हैं कि उनका इलाज नियमित तौर पर हो और उनके जीवनशैली में सुधार किया जाए।
