पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा बयान दिया है। उनके मुताबिक, भारत के सामने जो असली चुनौती है, वह पाकिस्तान नहीं, बल्कि देश के भीतर का सांस्कृतिक और नैतिक पतन है।

उमा भारती ने कहा कि बाहरी दुश्मन का डर जितना हो, लेकिन देश के अंदरूनी संकट को नज़रअंदाज करना ज्यादा खतरनाक है। उनके अनुसार, भारत को विदेशों से लड़ाई से ज्यादा अपने मूल्यों की रक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने साथ ही हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को दोहराया। उनका कहना था कि अगर भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को नक्कारा देने लगे, तो राष्ट्रमंडल खतरे में पड़ सकता है। यह विचार उन्होंने कई मौकों पर सार्वजनिक किए हैं।
उमा भारती ने कहा कि देश में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है। युवा पीढ़ी में धर्म-संस्कृति की समझ कम हो रही है। वे यह मानती हैं कि आधुनिकता और सांस्कृतिक पहचान के बीच संतुलन बनाना बहुत जरूरी है।
उनका यह बयान राजनीतिक चर्चा में तेजी ला सकता है। क्योंकि आजकल हिंदू राष्ट्र और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर बहस और भी गहराती जा रही है।
उमा भारती ने चुनाव आयोग, राजनीतिक दलों और सरकारों से आग्रह किया कि वे धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को अनदेखा न करें। उनके मुताबिक, केवल बाहरी सुरक्षा ही पर्याप्त नहीं है — देश की आत्मा की भी रक्षा होनी चाहिए।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न राजनीतिक विश्लेषक और समर्थक मौजूद थे। उनके विचारों ने आलोचकों और समर्थकों दोनों का ध्यान खींचा है।
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अगर उमा भारती की यह सोच व्यापक स्तर पर स्वीकार होती है, तो यह भविष्य में भारत की राजनीतिक रणनीति और सामाजिक आत्मा पर गहरा असर डाल सकती है।
