पुणे। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा दौर में दुनिया गहरे आर्थिक और राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है और इसी के साथ “पावर” यानी ताकत की परिभाषा भी बदल रही है। उन्होंने यह टिप्पणी पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए की। जयशंकर ने कहा कि आज वैश्विक व्यवस्था में एक ही केंद्र के बजाय कई शक्ति केंद्र उभर रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं।

विदेश मंत्री के अनुसार, बीते दशकों में दुनिया एक अपेक्षाकृत स्थिर शक्ति-संरचना की आदी थी, लेकिन अब हालात अलग हैं। आर्थिक क्षमता, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला, रणनीतिक साझेदारियां और कूटनीतिक प्रभाव—ये सभी मिलकर देशों की वास्तविक ताकत तय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देशों के बीच स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा दिखाई देती है, लेकिन यही प्रतिस्पर्धा अपने आप में एक नया संतुलन भी रच रही है।
जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्वीकरण के पुराने मॉडल में बदलाव आ रहा है। कई देश अब आत्मनिर्भरता, भरोसेमंद साझेदारियों और क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बदलाव के बीच भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अवसर भी हैं और जिम्मेदारियां भी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इन वैश्विक परिवर्तनों को समझें और कौशल, नवाचार तथा नैतिक नेतृत्व के साथ आगे बढ़ें।
अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने कहा कि कूटनीति केवल सरकारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि शिक्षा संस्थान, उद्योग, तकनीक और समाज भी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। आज की दुनिया में प्रभाव का अर्थ केवल सैन्य या आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, सहयोग और समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता भी है।
अंत में जयशंकर ने कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत को आत्मविश्वास के साथ, लेकिन संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने छात्रों को इस परिवर्तनशील विश्व में जिम्मेदार वैश्विक नागरिक बनने का संदेश दिया।
