बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान घोषित योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सभी विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि हर योजना पर अब तक कितना काम हुआ, किस चरण में अटकी है और कौन सी परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हुईं—इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट अपडेट दिया जाए।

नीतीश कुमार ने कहा कि प्रगति यात्रा का मकसद जनता से सीधे जुड़कर उनकी जरूरतों को समझना था और अब यह जरूरी है कि घोषणाओं का असर जमीन पर दिखे।

कई जिलों से मिली फील्ड रिपोर्ट में प्रोजेक्ट्स की गति धीमी मिली है। इसके बाद सीएम ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि वे काम की वास्तविक प्रगति सामने रखें। अधिकारियों को कहा गया है कि अधूरी परियोजनाओं पर तेजी लाई जाए और जहां देरी हो रही है, उसके कारण भी बताए जाएं।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जनता से किए वादों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि योजनाओं की मॉनिटरिंग नियमित की जाए। कई विभागों को अपनी रिपोर्ट 24 से 48 घंटे के भीतर भेजने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि सीएम जल्द ही सभी जिलों की समीक्षा बैठक भी करेंगे। इस दौरान वे प्रगति यात्रा से जुड़ी घोषणाओं की तुलना वास्तविक काम से करेंगे।

कई जिलों में सड़क, शिक्षा, जलापूर्ति और स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजनाओं पर काम धीमा बताया गया है। इसी वजह से मुख्यमंत्री ने विभागों को चेतावनी देते हुए कहा है कि जनता को लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें लापरवाही नहीं चलेगी।

सीएम कार्यालय का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार बड़ा फैसला भी ले सकती है। जिन परियोजनाओं पर तेजी की जरूरत होगी, उन्हें टॉप प्रायोरिटी में रखा जाएगा।

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वहीं, जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां कार्रवाई भी संभव है। बिहार सरकार ‘प्रगति यात्रा’ को अपने सबसे महत्वपूर्ण फील्ड-आधारित कार्यक्रमों में मानती है, इसलिए योजनाओं पर वास्तविक प्रगति अब सरकार के लिए बड़ा मुद्दा बन गई है। आने वाले दिनों में इसकी पूरी तस्वीर राज्य स्तर पर सामने आने की उम्मीद है।

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